बिहार विधान परिषद में अहम विधेयक पर मुहर। सांकेतिक तस्वीर
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य के सभी प्रकार के सरकारी कार्यालयों के लिए अब समूह ख, ग व घ के पदों पर कर्मचारी चयन आयोग एवं तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से नियुक्ति होगी।
विधानसभा से पास नई नियमावली संशोधन विधेयक बुधवार को विधान परिषद ने पारित कर दी। बोर्ड एवं निगमों के समूह ख एवं ग के पदों पर तकनीकी सेवा आयोग तथा समूह घ के पदों पर कर्मचारी चयन आयाेग नियुक्ति करेगा।
इन विधेयकों पर सदन में संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि संशोधन के बाद पारदर्शिता पूर्ण नियुक्तियां की जा सकेंगी।
अब तक बोर्ड एवं निगमों में इन श्रेणियों के पदों पर नियुक्तियां संबंधित संस्थानों द्वारा स्वयं की जाती रही हैं। मंत्री ने सदन को बताया कि सरकार के अधीन सभी सरकारी एवं क्षेत्रीय कार्यालयों में समूह ख, ग एवं घ के पदों पर नियुक्तियां पहले से ही संबंधित आयोगों के माध्यम से की जा रही हैं। अब इसी तरह की व्यवस्था बोर्ड एवं निगमों में भी लागू की जाएगी।
बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 का प्रावधान
अब नगर निगम में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों को महापौर या अध्यक्ष नामित नहीं कर सकेंगे। इनका चुनाव अब गुप्त मतदान से होगा।
मतदान के आधार पर ही समिति के सदस्यों का चयन किया जाएगा।विधान परिषद को उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने बताया कि वर्तमान के अधिनियम के अनुसार सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों को निर्वाचित महापौर या अध्यक्ष द्वारा नामित किया जाता है।
इससे विरोधी वार्ड पार्षदों को इसमें अवसर ही नहीं मिला पाता था। साथ ही समिति के गठन के दौरान अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
पक्षपात के आरोप, निर्वाचितों में से किसी एक या कुछ व्यक्तियों में अधिकारों के केंद्रीयकरण जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती थी। अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
बिहार सिविल न्यायालय विधेयक 2026
अब बिहार का सिविल न्यायालय अधिनियम होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सिविल न्यायालय विधेयक 2026 के प्रावधानों को लागू किया जाना आवश्यक है।
इसके साथ ही सदन ने बिहार सिविल न्यायालय विधेयक, 2026 को भी पारित कर दिया। इस संबंध में संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने सदन बताया कि इसके लागू होने के बाद बिहार, उड़ीसा, बंगाल एवं असम सिविल न्यायालय की पूर्व व्यवस्था के स्थान पर बिहार सिविल न्यायालय नाम प्रभावी होगा।
‘बिहार, उड़ीसा, बंगाल और असम सिविल न्यायालय’ विधेयक अंग्रेजों के जमाने में 1887 का था। इसमें अब स्थानीय बदलावों एवं परिस्थितियों को देखकर बनाया गया है।
खूब हंसे मुख्यमंत्री नीतीश
संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी की तरफ से तकनीकी सेवा आयोग एवं बिहार कर्मचारी चयन आयोग के विधेयक पारित कराने की प्रक्रिया के दौरान सत्ता पक्ष सामान्य तौर पर जहां हां बोल रहा था, वहां इसके प्रति उत्तर में विपक्षी विधान पार्षद खासतौर पर सुनील सिंह एक खास अंदाज में ऊंचे स्वर ना कहते सुन मुख्यमंत्री खूब हंसे।
सुनील सिंह के बार- बार ना बोलने पर सीएम ने मजाक में कहा कि आप ही इतना बोल रहे हैं और कोई इस तरह ना नहीं कह रहा है।
सभापति अवधेश नारायण सिंह ने भी सुनील सिंह से कहा कि आप ना अगर धीमे भी बोलेंगे, तो काम चलेगा। हालांकि ,बाद के दो विधेयकों पर न की आवाज नहीं आई।  |
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