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भिवानी में कर्मचारियों का विशाल प्रदर्शन, OPS और रेगुलर करने की उठाई मांग; सरकार को दी चेतावनी

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कैप्शन: भिवानी में कर्मचारियों का विशाल प्रदर्शन (जागरण फोटो)



जागरण संवाददाता, भिवानी। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर वीरवार को राष्ट्रीय मांग दिवस के अवसर पर भिवानी में कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर हुंकार भरी। स्थानीय चौ. सुरेंद्र सिंह मेमोरियल पार्क में जिले भर से जुटे सैकड़ों कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को अपना मांग पत्र सौंपा।

जिला प्रधान सुमेर सिंह आर्य ने बताया कि गत 23 से 26 जनवरी तक महाराष्ट्र के शिरडी में आयोजित 18वें राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया था कि देश भर के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लामबंद होंगे। इसी कड़ी में 26 फरवरी को पूरे हरियाणा के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर सरकार को चेतावनी दी गई है।

यूनियन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इन मांगों पर जल्द विचार नहीं करती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों में कच्चे कर्मचारियों का नियमितीकरण, पुरानी पेंशन की बहाली, आठवां वेतन आयोग, निजीकरण पर रोक, कच्चे-पक्के कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा अनिवार्य हो। चिराग योजना को वापस लिया जाए और शिक्षा बजट को दोगुना किया जाए आदि है।

प्रदर्शन के दौरान मंच का संचालन जिला सचिव धर्मबीर भाटी ने किया। सभा को संबोधित करने वालों में मुख्य रूप से नगरपालिका प्रधान जयहिंद, तोशाम सचिव राजेश दुल्लेहड़ी, बवानीखेड़ा प्रधान चांदराम, और रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला सचिव राजबीर कादयान शामिल रहे।

इसके अलावा, रिटायर्ड कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव वजीर सिंह, सर्व कर्मचारी संघ के पूर्व राज्य प्रधान मास्टर शेरसिंह, सीटू से सुखदेव व जिला सचिव अनिल कुमार, वरिष्ठ उप प्रधान सूरजभान जटासरा, खंड प्रधान अशोक गोयत, पब्लिक हेल्थ से जिला प्रधान अनिल बागड़ी, राजकुमार, और अध्यापक संघ के ब्लाक प्रधान संजय गौरीपुर व रमेश कुमार ने भी अपने विचार रखे और सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों की आलोचना की।

कर्मचारी नेताओं ने अंत में कहा कि आज का यह प्रदर्शन केवल एक चेतावनी है। सरकार कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा न ले। यदि समय रहते इन 10 सूत्रीय मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर एक बड़ा और निर्णायक आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन और प्रशासन की होगी।   
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