गोरखपुर। गोरखपुर के मेयर मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से शीघ्र उपचार की सुविधा बेहतर बनाने के प्रयासों के तहत, जिले और आसपास के इलाकों के कैंसर से पीड़ित बच्चों का अब बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज किया जा सकता है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने एक बयान में कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए श्रीवास्तव ने बचपन के कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानने और बिना देरी किए चिकित्सा सहायता लेने के लिए जागरूकता फैलाने पर जोर दिया।
भाजपा नेता और अखिल भारतीय महापौर परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीवास्तव ने इससे पहले बचपन के कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उत्साही साइकिल चालकों के साथ भाग लिया।
बयान में कहा गया कि राज्य में ही बच्चों को सर्वोत्तम उपचार दिलाने के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के संकल्प को उजागर करते हुए मेयर ने 'साइकिल फॉर गोल्ड' राष्ट्रीय पहल के गोरखपुर चरण को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसमें लोगों ने साइकिल की सवारी का आनंद लिया।
श्रीवास्तव ने 417 से अधिक शहरों में 12 लाख किलोमीटर की दूरी तय करने वाली रैली का समर्थन करते हुए कहा कि जब डॉक्टर, स्कूल, साइकिल चालक और नागरिक सभी एक साथ आते हैं, तो यह एक सशक्त संदेश देता है कि कैंसर से जूझ रहे बच्चे अकेले नहीं हैं।
भाजपा नेता ने आगे कहा कि कैनकिड्स द्वारा आयोजित यह अभियान विश्व कैंसर दिवस (4 फरवरी) को शुरू किया गया था, जो सबसे बड़ी चैरिटी साइकिलिंग चुनौतियों में से एक है।
बयान में आगे कहा गया कि मेयर गोरखपुर में साइकिल चालकों, डॉक्टरों, छात्रों, कॉरपोरेट जगत के लोगों और समुदायों के साथ शामिल हुए, जहां साइकिल चालकों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज से गोरखनाथ मठ तक साइकिल चलाई।
आईसीएमआर की केंद्रीय मानव अनुसंधान नीति समिति की सदस्य और चाइल्डहुड कैंसर इंटरनेशनल की डब्ल्यूएचओ दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र की प्रतिनिधि पूनम बगई ने सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह आंदोलन कैंसर से जूझ रहे बच्चों के लिए समुदायों के एकजुट होने की शक्ति को दर्शाता है।
कैनकिड्स की संस्थापक अध्यक्ष और पैलियम इंडिया की उपाध्यक्ष बगई ने कहा कि उनके प्रयास बाल कैंसर देखभाल में सुधार लाने पर केंद्रित हैं, जिसके लिए वे निदान और उपचार के लिए राज्यव्यापी रेफरल नेटवर्क बना रहे हैं, आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों को शीघ्र निदान के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं, और परिवारों को वित्तीय और सामाजिक सहायता प्रदान कर रहे हैं।

Deshbandhu
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