search

Delhi: केजरीवाल के बाद सिसोदिया ने जस्टिस स्वर ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 293

नई दिल्ली: राजधानी के चर्चित आबकारी नीति मामले में एक नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल के बाद अब पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई से खुद को अलग करने का फैसला किया है। सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि वह न तो व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होंगे और न ही उनकी ओर से कोई वकील बहस करेगा। इस फैसले ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।





सिसोदिया का पत्र

मनीष सिसोदिया ने अपने पत्र में लिखा कि उन्हें इस अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही है। उन्होंने कहा, “मेरी तरफ से कोई वकील पेश नहीं होगा। अब मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।” उनका यह रुख अरविंद केजरीवाल के पहले दिए गए बयान और फैसले के समान है, जिसमें उन्होंने भी इसी अदालत में पेश न होने की बात कही थी।

केजरीवाल का भी समान रुख

इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को चार पन्नों का पत्र लिखकर यह घोषणा की थी कि वह इस मामले में आगे न तो खुद पेश होंगे और न ही उनके वकील अदालत में जिरह करेंगे। उन्होंने अपने फैसले को “अंतरात्मा की आवाज” बताते हुए कहा था कि वह इसके सभी कानूनी परिणामों का सामना करने के लिए तैयार हैं, भले ही इससे उनके हितों को नुकसान पहुंचे।





‘न्याय न सिर्फ हो, बल्कि दिखना भी चाहिए’

केजरीवाल ने अपने पत्र में यह भी कहा कि न्याय केवल किया ही नहीं जाना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। उन्होंने अदालत में पहले दी गई दलीलों को दोहराते हुए निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह न्यायमूर्ति शर्मा के किसी भी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

गांधी के सत्याग्रह का दिया हवाला

दोनों नेताओं ने अपने फैसले को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी के सत्याग्रह सिद्धांत का हवाला दिया है। केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा कि उनका यह निर्णय केवल इस विशेष मामले तक सीमित है। उन्होंने न्यायपालिका के भीतर पहले के उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ न्यायाधीशों ने संभावित हितों के टकराव के कारण स्वयं को मामलों से अलग किया है।





अदालत के रुख से बढ़ा विवाद

दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा से इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग की थी। हालांकि, 20 अप्रैल को अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया और टिप्पणी की कि किसी भी राजनेता को न्यायपालिका के प्रति अविश्वास फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस टिप्पणी के बाद केजरीवाल और सिसोदिया का रुख और सख्त हो गया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने पहले इस मामले में केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिसकी सुनवाई फिलहाल जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ कर रही है। इसी अपील पर चल रही सुनवाई को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ है।





कानूनी और राजनीतिक असर

दोनों प्रमुख नेताओं का अदालत की कार्यवाही से दूरी बनाना कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल केस की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, बल्कि न्यायपालिका और राजनीति के बीच संबंधों पर भी बहस तेज हो गई है।







Editorial Team




Delhi NewsArvind KejriwalManish SisodiaJustice Swarna Kanta SharmaDelhi High Courtमनीष सिसोदियाDelhi Excise Policy Cases










Next Story
like (0)
deltin55administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin55

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

12

Posts

1510K

Credits

administrator

Credits
151425