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पुणे केतन हत्याकांड: परिवार ने फास्ट-ट्रैक क ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 49

मुंबई : पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। रियल एस्टेट कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में उनके परिजनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिवार चाहता है कि मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो ताकि जल्द न्याय मिल सके और दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जो भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगाने का संदेश दे। परिजनों का कहना है कि उन्होंने जिस पीड़ा का सामना किया है, वैसी त्रासदी किसी अन्य परिवार को न झेलनी पड़े।




मंगेतर और उसके कथित प्रेमी पर हत्या का आरोप

पुलिस के अनुसार, केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी पर लोहागढ़ किले से धक्का देकर उनकी हत्या करने का आरोप है। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। आरोप है कि 18 जून को सिया और केतन घूमने के लिए पुणे के लोहागढ़ किले गए थे। इसी दौरान केतन गहरी खाई में गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई। बाद में जांच में हत्या की आशंका सामने आने पर पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया।




'45-50 साल पुराना था पारिवारिक रिश्ता'

केतन के दादा ने बताया कि उनका गोयल परिवार से चार से पांच दशक पुराना परिचय था। उन्होंने कहा कि शादी का प्रस्ताव भी गोयल परिवार की ओर से आया था, इसलिए कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि दोनों परिवारों के बीच ऐसा दर्दनाक घटनाक्रम सामने आएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे विश्वास के कारण परिवार को किसी तरह के खतरे की आशंका नहीं थी।
'अगर रिश्ता खत्म करना था तो कर देती'





केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने बेटे की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा छिन गया। उन्होंने कहा कि यदि सिया शादी नहीं करना चाहती थी तो रिश्ता समाप्त कर सकती थी, लेकिन हत्या जैसा कदम उठाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उनका कहना है कि जब तक इस मामले में शामिल प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति को कानून के अनुसार सजा नहीं मिलती, तब तक वह न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि केतन ने पहले सिया के व्यवहार को लेकर कुछ चिंताएं व्यक्त की थीं, लेकिन परिवार ने पुराने संबंधों और विश्वास के कारण उन बातों को गंभीरता से नहीं लिया।




परिवार ने घटनास्थल पर भी उठाए सवाल

केतन के परिजनों के अनुसार, लोहागढ़ किले पर जाने का प्रस्ताव सिया की ओर से रखा गया था। उन्होंने दावा किया कि केतन शुरुआत में वहां जाने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन बाद में तैयार हो गए। परिवार का कहना है कि कुछ ही घंटों बाद उन्हें केतन के गिरने की सूचना मिली। बाद में जब वे स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे, तो उन्हें यह स्थान ऐसा नहीं लगा जहां से किसी व्यक्ति का सामान्य रूप से फिसलकर गिर जाना आसान हो। इसी आधार पर उन्होंने शुरू से घटना पर संदेह जताया।

सिया की मां ने भी कड़ी कार्रवाई की मांग की

मामले में सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में उनकी बेटी दोषी साबित होती है तो उसे कानून के अनुसार सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपराध करने वाला चाहे कोई भी हो, उसके साथ कानून के मुताबिक सख्ती से पेश आना चाहिए।
जांच में सामने आया नया गवाह

इस मामले की जांच के दौरान पुणे ग्रामीण पुलिस को एक अहम गवाह मिला है। चेतन चौधरी की दुकान पर काम करने वाले नीरज कुमार ने पुलिस के सामने बयान दर्ज कराया है। पुलिस के अनुसार, नीरज ने बताया कि घटना वाले दिन चेतन अपना मोबाइल फोन उसके पास छोड़कर उसका मोबाइल लेकर लोहागढ़ किले गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह बयान घटना के दिन आरोपितों की गतिविधियों और संचार संबंधी तथ्यों की पुष्टि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पुलिस अब मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।

महाराष्ट्र सरकार करेगी एसआईटी का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का फैसला किया है। राज्य विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने सरकार को एसआईटी बनाने का निर्देश दिया। हालांकि, विधानसभा में इस दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या पीठासीन अधिकारी का निर्देश सरकार पर बाध्यकारी है। इसके बावजूद सरकार ने मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए एसआईटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।

जांच जारी, न्याय का इंतजार

केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच अभी जारी है और पुलिस विभिन्न गवाहों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों तथा अन्य सबूतों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी। वहीं, पीड़ित परिवार की मांग है कि मुकदमे की सुनवाई तेज गति से हो और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कठोर सजा दी जाए।






Editorial Team



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