ट्रंप का बड़ा अल्टीमेटम! 'एक घंटे में तबाह कर देंगे ईरान के पुल और ऊर्जा तंत्र'
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की अपनी धमकी को फिर से दोहराया और कहा कि अमेरिका या तो ईरान के साथ कोई समझौता करेगा या फिर 'काम तमाम' कर देगा।
ओवल कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना अभियान के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। बातचीत अगर विफल रहती है तो वह सैन्य अभियानों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा , "हम या तो कोई समझौता करने जा रहे हैं या फिर काम तमाम करने जा रहे हैं। ठीक है? और काम तमाम करना कोई मुश्किल काम नहीं होगा। मैं समझौता करना ज्यादा पसंद करूंगा, क्योंकि मैं नौ करोड़ 10 लाख लोगों (ईरान की आबादी) को प्रभावित नहीं करना चाहता।"
उन्होंने कहा, "हम एक घंटे में उनके पुलों को ध्वस्त कर सकते हैं, हम उनकी ऊर्जा आपूर्ति को पूरी तरह ठप कर सकते हैं। उनके पास अब कोई पैसा नहीं बचा है। हमने उन्हें कोई पैसा नहीं दिया है।"
श्री ट्रंप का यह बयान अमेरिका-ईरान के बीच हाल ही में हुई उस अप्रत्यक्ष बातचीत के बाद आया है, जो बेनतीजा रही थी। इस का मकसद 60 दिनों के उस युद्धविराम को आगे बढ़ाना था, जो इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिकी-इजरायली हमलों से भड़के युद्ध के बाद लागू हुआ था।"
श्री ट्रंप ने दावा किया कि ईरान बातचीत के दौरान पहले ही कुछ रियायतें दे चुका है, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी तक कोई अंतिम समझौता होना बाकी है। उन्होंने कहा, "हमें रियायतें मिली हैं, अब उन्हें उन रियायतों पर कायम रहना होगा।" उन्होंने अपने इस दावे को भी दोहराया कि भविष्य में होने वाला कोई भी परमाणु समझौता अमेरिका को ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने की अनुमति देगा।
ईरानी अधिकारियों ने हालांकि इस प्रस्ताव को बार-बार खारिज किया है, जिससे यह मौजूदा बातचीत का सबसे संवेदनशील और पेचीदा हिस्सा बन गया है।
श्री ट्रंप ने कहा, "हम शायद किसी समझौते के करीब हैं, मुझे नहीं पता। लेकिन हम किसी न किसी तरह से जीत हासिल करके ही रहेंगे।" श्री ट्रंप के इस सकारात्मक रुख के बावजूद बातचीत फिलहाल रुकी हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष चर्चा को स्थगित करने पर सहमत हुए थे। ऐसा इसलिए है, क्योंकि ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के कार्यक्रम चल रहे हैं, जिसके बाद परोक्ष बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
हालिया युद्ध के दौरान अमेरिका के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए श्री ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि वहां सत्ता परिवर्तन का वे स्वागत करते, लेकिन यह कभी भी उनका मुख्य लक्ष्य नहीं था।
सीबीएस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पत्रकारों से कहा, "वहां की सरकार को गिराना हमारा मकसद कभी नहीं था।"
उनका यह बयान अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान के शुरुआती चरणों में उन्होंने जो टिप्पणियां की थी, यह उसके बिल्कुल उलट है, जब श्री ट्रंप ने बमबारी अभियान खत्म होने के बाद ईरानी जनता को अपनी सरकार पर नियंत्रण करने के लिए सार्वजनिक रूप से उकसाया था।
उनकी यह टिप्पणियां ईरान में श्री खामेनेई के अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों के बीच आयी हैं, जहां अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में तेहरान और अन्य शहरों में भारी भीड़ उमड़ रही है।
खुद को हारा हुआ या टूटा हुआ दिखाने के बजाय ईरान की जनता लगातार अपना प्रतिरोध और राष्ट्रीय एकता प्रदर्शित कर रही है। ईरानी अधिकारी और लाखों समर्थक किसी भी बाहरी दबाव का विरोध जारी रखने और अपने दिवंगत नेता की मौत का बदला लेने का संकल्प ले रहे हैं।

Deshbandhu
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