मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली और बिकवाली की। दोपहर के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक टूट गए। बाजार पर दबाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ अंतरिम समझौते को समाप्त मानने की बात कही, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका गहरा गई।
सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
दोपहर करीब 2:20 बजे तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,784 अंक की गिरावट के साथ 76,396 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 सूचकांक 541 अंक टूटकर 23,900 के स्तर से नीचे पहुंच गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों की कुल संपत्ति में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी दर्ज की गई। इसके साथ ही बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 472 लाख करोड़ रुपये रह गया।
लगभग सभी सेक्टर दबाव में
बिकवाली केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और भारती एयरटेल जैसे दिग्गज शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX भी 26 प्रतिशत उछलकर 14.67 पर पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है। निफ्टी बैंक, एफएमसीजी और ऑयल एंड गैस सूचकांकों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग दो प्रतिशत तक फिसल गए। एनएसई पर कारोबार के दौरान केवल 694 शेयरों में तेजी दर्ज हुई, जबकि 2,525 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए या कारोबार करते रहे।
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहें
1. अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ अंतरिम समझौते को समाप्त मानते हुए सख्त बयान दिया। साथ ही अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई और तेल निर्यात पर कड़े प्रतिबंधों की खबरों ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इससे मध्य पूर्व में नए संघर्ष की आशंका तेज हो गई।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड लगभग 5 प्रतिशत चढ़कर 78.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 74 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता दिखा। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ाता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ता है।
3. वैश्विक बाजारों में कमजोरी
भारतीय बाजारों पर अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों की गिरावट का भी असर पड़ा। यूरोप के प्रमुख सूचकांक—ब्रिटेन का FTSE, फ्रांस का CAC और जर्मनी का DAXकरीब 2 प्रतिशत तक टूट गए। एशियाई बाजारों में भी दबाव बना रहा और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 6 प्रतिशत लुढ़क गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ती जोखिम की भावना ने भारतीय बाजार में भी बिकवाली को तेज कर दिया।
4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
अमेरिका के 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.565 प्रतिशत और 30 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.068 प्रतिशत पर पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ता है, जिससे उभरते बाजारों सहित इक्विटी बाजारों से पूंजी निकलने लगती है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
5. बढ़ी अस्थिरता और कमजोर निवेशक धारणा
इंडिया VIX में तेज उछाल इस बात का संकेत है कि बाजार में निकट भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। भू-राजनीतिक तनाव, महंगे कच्चे तेल, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की सतर्कता ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते और तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

Editorial Team
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