नई दिल्ली, भारत का वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) जून 2026 में सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष जून 2025 में 34.98 अरब डॉलर था। यह जानकारी वाणिज्य मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों में दी गई।
हालांकि, कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) और कीमती धातुओं की वैश्विक कीमतों में तेजी के कारण आयात में निर्यात की तुलना में अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते जून में वस्तु व्यापार घाटा (मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट) बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया।
आंकड़ों के अनुसार, आयात में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 70.84 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष जून में यह 54.08 अरब डॉलर था। इसके कारण व्यापार घाटा जून 2025 के 19.10 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 59 प्रतिशत बढ़ते हुए 30.43 अरब डॉलर हो गया।
हालांकि, मासिक आधार पर जून में निर्यात घटकर 40.41 अरब डॉलर रह गया, जबकि मई में यह 45.20 अरब डॉलर था। इसी तरह आयात भी मई के 73.41 अरब डॉलर से घटकर 70.84 अरब डॉलर पर आ गया।
सरकार के अनुसार, आयात में तेज वृद्धि की मुख्य वजह कच्चे तेल और कीमती धातुओं, विशेष रूप से पेट्रोलियम तथा रत्न एवं आभूषण (जेम्स एंड ज्वेलरी) की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी रही।
सरकार ने यह भी बताया कि पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा रत्न एवं आभूषण क्षेत्रों में व्यापार घाटा बढ़ा है। अधिकारियों के मुताबिक, देश में बढ़ती आय और तेजी से बढ़ रहे मध्यम वर्ग की मजबूत मांग के चलते इलेक्ट्रॉनिक सामानों का आयात लगातार बढ़ रहा है।
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का कुल वस्तु निर्यात लगभग 15.9 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, खाड़ी देशों को भारत का निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट आया है। यह मार्च में 2.62 अरब डॉलर से बढ़कर मई में 5.3 अरब डॉलर हो गया। इसकी एक बड़ी वजह कारोबारियों द्वारा वैकल्पिक शिपिंग मार्गों का उपयोग करना रही। वहीं, अप्रैल और मई के दौरान अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़कर 17.29 अरब डॉलर पहुंच गया।
भारत अन्य विकसित देशों के बाजारों तक अपनी पहुंच भी लगातार बढ़ा रहा है। ब्रिटेन (यूके) के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) इस महीने से लागू होने जा रहा है, जबकि यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ समझौते के अगले वर्ष की शुरुआत तक अंतिम रूप लेने की उम्मीद है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि अब भारत के कुल वस्तु निर्यात में आधे से अधिक हिस्सा एनएएफटीए और यूरोप के बाहर के क्षेत्रों का है, जो यह दर्शाता है कि भारत लगातार अपने निर्यात बाजारों में विविधता ला रहा है।

DB Desk
GovernmentIndia's merchandise exportsreached billion dollars in Junebusiness news
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