विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भारत की व्यापार नीति समीक्षा (Trade Policy Review) के दौरान अमेरिका ने भारत की कृषि संरक्षण नीतियों, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था और कृषि सब्सिडी को लेकर चिंता जताई है। अमेरिका ने भारत से कृषि क्षेत्र में व्यापार को प्रभावित करने वाली नीतियों और गैर-शुल्क बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को कम करने का आग्रह किया है।
WTO में अपने हस्तक्षेप के दौरान अमेरिका ने कहा कि भारत में कृषि क्षेत्र में उच्च स्तर का संरक्षण और अनिश्चित गैर-शुल्क बाधाएं बनी हुई हैं। अमेरिका ने भारत से आग्रह किया कि वह चावल और गेहूं सहित विभिन्न फसलों के लिए उत्पादन और व्यापार को प्रभावित करने वाली कृषि सहायता नीतियों को WTO के कृषि समझौते (Agreement on Agriculture) के अनुरूप बनाए।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बीच उठा मुद्दा

अमेरिका और भारत इस समय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि कृषि से जुड़े इन मुद्दों पर निरंतर संवाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा और भारत को अधिक पारदर्शी तथा पूर्वानुमेय व्यापारिक वातावरण विकसित करने में मदद मिलेगी।
WTO सदस्य देशों ने भी उठाए कई सवाल

23 जुलाई को समाप्त हुई भारत की व्यापार नीति समीक्षा के दौरान कई सदस्य देशों ने भारत की कृषि सहायता योजनाओं और व्यापार प्रतिबंधों पर स्पष्टीकरण मांगा। WTO की समीक्षा बैठक की अध्यक्ष राजदूत नेला पेपे तवीता-लेवी ने चर्चा का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि सदस्य देशों ने भारत की कई कृषि नीतियों पर सवाल उठाए।
इनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था, कृषि इनपुट सब्सिडी, सार्वजनिक भंडारण (Public Stockholding) कार्यक्रम, आयात शुल्क एवं टैरिफ रेट कोटा (TRQ) का प्रबंधन, आयात लाइसेंस व्यवस्था तथा गेहूं, चावल, चीनी और प्याज जैसे कृषि उत्पादों पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंध शामिल हैं।


SPS मानकों पर भी पारदर्शिता की मांग
WTO के कई सदस्य देशों ने भारत के सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी (SPS) उपायों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने वैज्ञानिक जोखिम मूल्यांकन, खाद्य सुरक्षा मानकों, कीटनाशक अवशेषों (Maximum Residue Limits) की सीमा तथा SPS उपायों की समानता तय करने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता बताई।
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