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डिग्री और मार्कशीट घोटाले के मुख्य आरोपी को मिली जमानत, यूपी की इस यूनिवर्सिटी से जुड़ा है मामला

cy520520 2025-10-15 21:36:58 views 1254
  



जागरण संवाददाता, हापुड़। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट घोटाले के मुख्य आरोपी विजेंद्र सिंह उर्फ विजेंद्र सिंह हुड्डा को जमानत दे दी है। पिलखुवा स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी के चांसलर विजेंद्र मई 2025 से जेल में बंद थे।

कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया जमानत का मामला बनता है, हालांकि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री बनाने का पर्दाफाश एसटीएफ की टीम ने किया था। इस संबंध में थाना पिलखुवा में दर्ज किया गया था। जांच में पता चला कि मोनाड यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी मार्कशीट्स, डिग्रियां और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार किए जा रहे थे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मई 2025 में एसटीएफ ने यूनिवर्सिटी पर छापेमारी की, जिसमें 1,372 फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट जब्त की गईं। इसके अलावा, मोबाइल फोन, लेपटाप और नकद राशि भी बरामद हुई। विजेंद्र सहित दस लोगों को गिरफ्तार किया गया। जिनमें यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर नितिन कुमार सिंह, स्टाफ कमल बत्रा और अन्य शामिल थे।

एसटीएफ के अनुसार, यह रैकेट विभिन्न यूनिवर्सिटी और कालेजों की फर्जी डिग्रियां तैयार कर रहा था और मोनाड यूनिवर्सिटी इसका मुख्य केंद्र था। मार्च 2025 में एक अन्य रैकेट का भंडाफोड़ किया था, जहां मास्टरमाइंड दानिश मिश्रा को आगरा से गिरफ्तार किया गया। दानिश के पास से मोनाड यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थानों की फर्जी डिग्रियां बरामद हुईं।

वहीं, जांच में पता चला कि इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल नौकरियां हासिल करने के लिए किया जा रहा था, और अब ऐसे कई लोगों की जांच चल रही है जिन्होंने इनका उपयोग किया। हालांकि, हुड्डा के अधिवक्ताओं ने दावा किया कि यूनिवर्सिटी खुद फर्जी डिग्रियों का शिकार है और उसने इस संबंध में कई रिपोर्ट दर्ज कराई हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ने अपनी डिग्रियों की सुरक्षा के लिए कई प्रोटोकाल अपनाए हैं।
न्यायालय में यह दिए गए तर्क

विजेंद्र हुड्डा की जमानत याचिका पर सुनवाई जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की बेंच में हुई। उसके अधिवक्ता मनीष तिवारी ने तर्क दिया कि विजेंद्र निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक या गुप्त उद्देश्यों से फंसाया गया है। बरामद मार्कशीट यूनिवर्सिटी की वैध दस्तावेजों से मेल नहीं खातीं। जैसे कि उनमें पुराने सीरियल नंबर और एनरोलमेंट प्रीफिक्स हैं, जो 2012-2013 तक ही इस्तेमाल होते थे, जबकि विजेंद्र ने जनवरी 2023 में यूनिवर्सिटी चलानी शुरू की।

इसके अलावा, गिरफ्तारी अवैध थी क्योंकि गिरफ्तारी मेमो में आधार नहीं बताया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य (2025 एससीसी आनलाइन एससी 269) के फैसले का उल्लंघन है। राज्य की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट रूपक चौबे ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि विजेंद्र के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और उनका क्रिमिनल हिस्ट्री है। वह बाइक बाट घोटाले से जुड़े 118 मुकदमों में आरोपित हैं।

बाइक बाट स्कैम में ग्रेविटी इनोवेशन प्रमोटर्स लिमिटेड कंपनी ने निवेशकों से आकर्षक रिटर्न के नाम पर पैसे ठगे थे। हालांकि, डिफेंस ने खंडन किया कि विजेंद्र कंपनी के अधिकारी या डायरेक्टर नहीं थे, सिर्फ बिजनेस ट्रांजेक्शन के कारण फंसाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में सभी 118 मुकदमों को एक मुख्य मुकदमे में मर्ज कर दिया। ईडी ने मनी लांड्रिंग मामले में उन्हें अग्रिम जमानत दी थी।
न्यायालय का का फैसला और शर्तें

न्यायालय ने आरोपों की प्रकृति, साक्ष्यों, गवाहों से छेड़छाड़ की आशंका और अन्य तथ्यों को देखते हुए जमानत मंजूर की। विजेंद्र को पर्सनल बांड और दो स्योरिटी (समान राशि की) पर रिहा किया जाएगा। इसकी मुख्य शर्तें यह है कि वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे। कोई आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। गवाहों पर दबाव नहीं डालेंगे और ट्रायल में सहयोग करेंगे। हर सुनवाई में न्यायालय में हाजिर होंगे। उल्लंघन पर ट्रायल कोर्ट जमानत रद्द कर सकती है।
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