deltin33 • 2025-10-16 17:37:37 • views 1264
धनतेरस आने में बस दो दिनों का वक्त है। धनतेरस के शुभ अवसर पर लोग जमकर सोना और चांदी में निवेश करते हैं। इस दिन सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि सोना या चांदी खरीदने से निवेशकों को धन की प्राप्ति होती है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
अगर आप भी इस धनतेरस या दिवाली में गोल्ड ज्वेलरी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो ये लेख आपके लिए बड़े काम का हो सकता है। अक्सर हम जब भी ज्वेलरी खरीदने जाते हैं, तो केवल मेकिंग चार्ज पर ही ध्यान देते हैं।
लेकिन ज्वैलर द्वारा मेकिंग चार्ज के अलावा कई तरह और चार्जिज लिए जाते हैं। इन चार्जिज अक्सर आम आदमी बेखबर रहता है। आइए अब जानते हैं कि मेकिंग चार्ज के अलावा ज्वैलर आपसे और कौन-कौन से चार्ज लेता है?
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कौन-कौन से लिए जाते हैं चार्ज?
वेस्टिंग चार्ज- जब भी ज्वेलरी बनती है, तो कुछ फीसदी सोना उसे बनाने में खराब हो जाता है। इसी को लेकर आपकी जेब से वेस्टिंग चार्ज लिया जाता है। मेकिंग प्रोसेस में जैसे सोना काटते वक्त, पिघलाते वक्त कुछ फीसदी सोना वेस्ट हो जाता है।
ज्वैलर अक्सर वेस्टिंग चार्ज के नाम पर 5 से 7 फीसदी फीस आपसे वसूलते हैं। ये चार्ज आपकी ज्वेलरी के वजन के हिसाब से लगाया जाता है। वहीं ये ज्यादा से ज्यादा 10 फीसदी तक हो सकता है।
हॉलमार्किंग चार्ज- कई ज्वैलर हॉलमार्किंग चार्ज तक लेते हैं।
पॉलिशिंग और फिनिशिंग चार्ज- ज्वेलरी बनाने के बाद उसमें एक फिनिशिंग दी जाती है। इसके साथ ही उसे पॉलिश भी किया जाता है। इसी को लेकर ज्वैलर आपसे चार्ज लेता है।
सेटिंग चार्ज- अगर ज्वेलरी में किसी तरह की अन्य मोतियों का काम हो, तो उसे फिक्स करने के लिए भी आपसे चार्ज वसूला जाता है।
ओवरचार्ज से कैसे बचें?
आपको ये ध्यान रखना है कि जब भी कोई ज्वेलरी खरीद रहे हैं, तो सभी तरह के चार्ज के बारे में पहले से ही पूछ लें।
इसके साथ हीं उन चार्जिज को शामिल कर, बाकी ज्वैलर से फाइनल कीमत की तुलना करें।
ये भी ध्यान रखें कि मेकिंग चार्ज में भी 5 फीसदी टैक्स लगाया जाता है।
इसके साथ ही हर दुकानदार से खरीदने से पहले फाइनल कीमत जरूर पूछें। |
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