cy520520 • 2025-10-17 20:38:35 • views 1249
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में सीतापुर से लाए गए बाघ के शावक ने चिड़ियाघर प्रशासन की परेशानी बढ़ा दी है। नाइट सेल में मां से अलग बाड़े में रह रहा यह शावक किसी को भी देखकर अटैक कर रहा है। इससे बाड़े में लगे लोहे की छड़ से टकराकर वह चोटिल हो रहा है। प्रशासन उसके आक्रामक व्यवहार से भयभीत होकर दूर से ही उसकी निगरानी कर रहा है। हैरत की बात यह है कि शावक की मां बाघिन भी उसे अपनाने को तैयार नहीं है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
सीतापुर जिले के महोली तहसील स्थित नरनी गांव के जंगल में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक हो गई थी। इसी के चलते वन विभाग की टीम ने वहां की एक बाघिन और बाघ को ट्रैंकुलाइज कर रेस्क्यू किया था। इसके बाद बाघ को कानपुर और बाघिन को गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिया। कुछ ही समय बाद उसी क्षेत्र में दोनों के एक शावक का भी टीम ने रेस्क्यू किया। स्वास्थ्य टीम ने परिक्षण के बाद शावक को गोरखपुर चिड़ियाघर में उसकी मां के पास भेजने का निर्णय लिया।
मां ने नहीं अपनाया
वन विभाग की टीम उसे लेकर यहां पहुंची तो चिड़ियाघर प्रशासन शावक को पहले उसकी मां के पास ले गए, मां ने उसे नहीं अपनाया और देखते ही आक्रामक हो गई। फिर प्रशासन ने नाइट सेल में ही शावक को एक अलग बाड़े में रख दिया और जू कीपर उसकी निगरानी करने लगे। लेकिन, जब भी उसके पास जू कीपर या चिकित्सक जा रहे थे, वह चिल्लाते हुए पंजा मार रहा और बाड़े के अंदर इधर-उधर दौड़ लगाकर छड़ से टकराकर गिर जा रहा। इससे उसे चोट लग रही है।
चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य वन्यजीव चिकित्सक डा. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि शावक की उम्र करीब एक वर्ष है। बाघिन और शावक को नाइटसेल में रखते हुए अलग-अलग बाड़े में रखा गया है। दोनों को एक-दूसरे से मिलाने का प्रयास नहीं किया जा रहा। शावक के व्यवहार पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। चिड़ियाघर प्रशासन उसकी मानसिक स्थिति को सामान्य करने की कोशिश में जुटा है। लेकिन, उसके करीब न जाकर दूर से ही यह सभी प्रक्रिया अपनायी जा रही है। नजदीक जाने पर वह दौड़ लगा रहा और छड़ से टकराकर गिर रहा है। |
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