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पार्टी बाद में रिश्तेदार पहले: बिहार चुनाव में कहीं पति-पत्नी, तो कहीं साली-समधन को जिताने में जुटे दिग्गज

cy520520 2025-10-19 13:07:09 views 1269
  

बिहार चुनाव में रिश्तेदारों को सेट करने में लगे नेता  



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। विधानसभा चुनाव में बेटा, पति, पत्नी, बहू, समधन, साली सबकी भागीदारी है। कहीं पति के लिए वोट मांगती पत्नी दिखेगी तो कहीं बहू के लिए ससुर आशीर्वाद मांगेंगे। पत्नी, बेटे और साली के लिए भी पसीना बहाते बड़े चेहरे होंगे। राजनीतिक और जातिगत समीकरण तथा पारिवारिक बंधन में सभी पार्टियों में यह दिख रहा है।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) प्रमुख जीतन राम मांझी एनडीए के अन्य प्रत्याशियों के साथ बहू, दामाद और समधन के लिए प्रचार करेंगे। गयाजी के इमामगंज से बहू दीपा मांझी, बाराचट्टी से समधन ज्योति देवी और जमुई के सिकंदरा से दामाद प्रफुल्ल कुमार मांझी मैदान में हैं।  

वर्तमान राज्य सरकार में मंत्री उनके बेटे संतोष कुमार सुमन भी पत्नी दीपा के लिए इमामगंज और सास ज्योति देवी के लिए बाराचट्टी में समर्थन की अपील करेंगे। चुनाव के क्रम में पिता-पुत्र सिकंदरा भी प्रचार अभियान में जाएंगे।  
गौड़ाबौराम से पति के लिए अपने कामकाज का हवाला देंगी स्वर्णा

दरभंगा के गौड़ाबौराम से इस बार भाजपा विधायक स्वर्णा सिंह के पति सुजीत कुमार को टिकट मिला है। इस सीट पर जातीय और धार्मिक समीकरण बड़े पैमाने पर असर डालते हैं। अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 17 प्रतिशत है। मुस्लिम मतदाता भी प्रभावशाली हैं।  

मौजूदा विधायक इन सभी समीकरणों और पिछले पांच साल में क्षेत्र में किए गए अपने कार्यों के आधार पर पति के लिए वोट मांगेंगी। इधर, पति-पत्नी का मेल सासाराम में भी दिखेगा। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा सासाराम में पत्नी के लिए प्रचार करते दिखेंगे।  

उन्होंने पत्नी स्नेहलता कुशवाहा को उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतारा है। उपेंद्र बेटे दीपक कुशवाहा को भी लाने की तैयारी में थे। इसके लिए महुआ पसंदीदा सीट थी, लेकिन गठबंधन में संतुलन नहीं बन पाया और यह सीट उनके खाते में नहीं आई। अब चर्चा है कि वे संगठन संभालेंगे, पत्नी सासाराम से मैदान में होंगी और बेटे का विधान परिषद के जरिए राजनीतिक करियर शुरू होगा।
पुत्र के लिए पिता बहाएंगे पसीना

समस्तीपुर के वारिसनगर में जदयू विधायक अशोक कुमार मुन्ना अब बेटे डा. मांजरीक मृणाल के लिए वोट अपील करेंगे। मृणाल अमेरिका में विज्ञानी थे और राजनीतिक रूप से नये हैं। पिता-पुत्र की जोड़ी घोसी में भी दिखेगी। अरुण कुमार के बेटे ऋतुराज कुमार को जहानाबाद की घोसी सीट से जदयू ने उम्मीदवार बनाया है।  

इधर, राजद ने भी रिश्तों का काकटेल प्रस्तुत किया है। रालोजपा केंद्रीय संसदीय बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को मोकामा से उम्मीदवार बनाया है। वहीं, सारण के परसा से राजद ने तेज प्रताप यादव की चचेरी साली करिश्मा यादव को उतारा है। हालांकि, पारिवारिक विवाद में तेज प्रताप भले अलग हैं, लेकिन उनके छोटे भाई तेजस्वी साली के लिए प्रचार करते दिखेंगे।
कोई चला पिता की विरासत संभालने, तो कोई वर्षों की आस पूरी करने

कीर्ति पांडेय, सिवान। सिवान में कुल आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें नए सूरमाओं से सजा रघुनाथपुर विधानसभा का चुनावी मैदान सर्वाधिक चर्चा में है। यहां से राजग, महागठबंधन और जनसुराज ने वैसे उम्मीदवारों को जनता के बीच भेजा है, जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।

राजग गठबंधन के जदयू ने विकास कुमार सिंह उर्फ जीशु सिंह, महागठबंधन में राजद ने दिवंगत पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन के पुत्र ओसामा शहाब और जनसुराज ने राहुल कीर्ति सिंह को मैदान में उतारा है। इस कारण यह हाट सीट बन गया है।

राजद ने रघुनाथपुर से अपने वर्तमान विधायक हरिशंकर यादव का टिकट काटकर ओसामा शहाब को प्रत्याशी बनाया है। गत चुनाव में राजद के पक्ष में एमवाई समीकरण था तो आसान जीत मिली थी।

तब वाई का साथ एम ने निभाया था। अब बारी एम की है, साथ वाई को देना है। ऐसे में इस चुनाव में राजद के एमवाई समीकरण की हर स्थिति में मजबूती की परख भी होनी है। मो. शहाबुद्दीन के निधन के बाद से उनके पुत्र ओसामा शहाब के राजनीति में कदम रखने की चर्चा थी, लेकिन उन्होंने चुप्पी साध रखी थी।

2024 के लोकसभा चुनाव में राजद ने टिकट नहीं मिला तो उनकी बजाय मां हेना शहाब निर्दलीय चुनाव लड़ीं लेकिन हार गईं। इसके बाद से ही दोबारा चर्चा शुरू हुई कि पिता की विरासत संभालने के लिए ओसामा शहाब को आगे आना ही होगा।  

ऐन चुनाव के पहले ओसामा ने अपनी मां हेना शहाब के साथ राजद की पुन: सदस्यता ली और राजद के सिंबल पर रघुनाथपुर से नामांकन भी कर दिया। यह सीट उनके लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जा रही है।

जदयू ने इस बार अपने पुराने कार्यकर्ता विकास कुमार सिंह उर्फ जीशु सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वह कई वर्षों से टिकट के लिए प्रयासरत थे, अंतत: पार्टी ने उनपर विश्वास जताया। आज नामांकन करेंगे। वह पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी यह नई राह आसान नहीं है, क्योंकि जदयू को पिछले चुनाव में नए चेहरे पर दांव लगाना उल्टा पड़ गया था।

राजद के हरिशंकर यादव ने जदयू के उम्मीदवार को हरा दिया था। जीशु सिंह को उम्मीद है कि जनता वर्तमान सरकार के कार्यों व कल्याणकारी योजनाओं से प्रसन्न होगी और राजग के घटक दलों के कैडर वोटरों का भी साथ मिलेगा।

जनसुराज इस बार बदलाव के उद्देश्य को लेकर जनता के बीच पहुंची है और पहली बार पार्टी के सिंबल पर अधिसंख्य वैसे उम्मीदवारों को जनता के बीच भेज रही है, जो पूर्व में किसी विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी के सिंबल पर भाग्य नहीं आजमाए हैं। रघुनाथपुर के लिए भी जनसुराज ने ऐसे ही उम्मीदवार राहुल कीर्ति सिंह पर भरोसा किया है।
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