cy520520 • 2025-10-22 02:37:35 • views 1259
पाकिस्तान फिर कर रहा आतंक फैलान की प्लानिंग। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पंजाब और सीमावर्ती राज्यों में आतंक फैलाने के लिए अब पाकिस्तान स्थित बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के साथ मिलकर नापाक साजिश रच रही है।
यह पंजाब में खालिस्तान आंदोलन को फिर से जिंदा करने की हर संभव जी-तोड़ कोशिश कर रही है। कई आतंकी संगठन इस खालिस्तान आंदोलन का हिस्सा हैं। इनमें बीकेआई, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, खालिस्तान लिबरेशन आर्मी, खालिस्तान टाइगर फोर्स आदि शामिल हैं। बीकेआई ने पाकिस्तान, कनाडा, पंजाब, जर्मनी और ब्रिटेन में अपने सभी संसाधनों को सक्रिय कर लिया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
बड़े पैमाने पर शुरू होने वाला है भर्ती अभियान
खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, पंजाब पुलिस ड्रग तस्करी और ड्रोन गतिविधियों पर लगाम लगाने में व्यस्त है, मगर चिंता की बात यह है कि बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान शुरू होने वाला है। आंदोलन को पुनर्जीवित करने की कोशिश करते हुए आईएसआई को लगा कि सभी 41 संगठनों को एक छत्रछाया में काम करना चाहिए। इसलिए उसने बीकेआई को एकीकृत आतंकी नेटवर्क की कमान सौंपने का फैसला किया, बाकी उसके अधीन काम कर सकते हैं।
आईएसआई ने बीकेआई को क्यों चुना?
बीकेआई को इस अभियान का नेतृत्व करने के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह सबसे शक्तिशाली संगठन है। इसके अलावा, पंजाब और विदेशों में बीकेआई का नेटवर्क अन्य संगठनों की तुलना में अधिक मजबूत है। बीकेआई गैंग्सटर नेटवर्क के साथ भी मिलकर काम करता है, जो खालिस्तान आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण है। गैंग्सटर ही धन जुटाते हैं और बीकेआई के लिए संभावित भर्तियों में मदद करते हैं। बीकेआई कई वर्षों से इन गैंग्सटरों के माध्यम से धन जुटा रहा है और इस नेटवर्क के लोगों का उपयोग आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए भी कर रहा है।
बीकेआई ने आईएसआई की मदद से पंजाब में ड्रोन अभियानों को बढ़ाया
हाल के दिनों में बीकेआई ने आईएसआई की मदद से पंजाब में अपने ड्रोन अभियानों को बढ़ा दिया है। इसका उद्देश्य पंजाब में ड्रग्स और गोला-बारूद की तस्करी करना है। ड्रग्स के कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आंदोलन के लिए धन जुटाने के लिए किया जाता है।
अधिकारियों का मानना है कि यूं तो भर्ती अभियान की कवायद लंबे समय से चल रही है। लेकिन, अब इसे गतिरोध भी देखना पड़ रहा है क्योंकि पंजाब में बहुत कम लोग इस विचारधारा से जुड़ते हैं। यहां तक कि पुराने कार्यकर्ता भी 1980 के दशक में देखी गई हिंसा से तंग आ चुके हैं और उन्होंने अपने बच्चों को इस आंदोलन के जाल में न फंसने की सलाह दी है।
पैसे, ड्रग्स का लालच देकर युवाओं को इस आंदोलन से जोड़ने पर जोर
बीकेआई का मानना है कि अगर भर्तियां विचारधारा के जरिए नहीं हो रही हैं, तो यह पैसे या ड्रग्स के लालच में हो सकती हैं। यही कारण है कि उन्नत तकनीक वाले ड्रोनों के माध्यम से तस्करी के लिए जोर दिया जा रहा है। कुछ ड्रोन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया गया है।
इस तकनीक का इस्तेमाल ड्रोन के देखे जाने या उसके मार गिराए जाने के खतरे में पड़ने पर उसे वापस बुलाने के लिए किया जा रहा है। इस तकनीक के इस्तेमाल से बीकेआई और आइएसआई को ड्रोनों को नष्ट होने से बचाने में मदद मिली है। बीकेआई को पूर्ण नियंत्रण मिलने के साथ पंजाब पुलिस और खुफिया एजेंसियों दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं। राज्य और केंद्रीय दोनों एजेंसियां इस खतरे से निपटने के लिए आपस में मिलकर काम कर रही हैं।
(न्यूज एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
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