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MP News: हिंगोट युद्ध में आग के गोलों के हमलों की सदियों पुरानी परंपरा; इंदौर में 36 लोग घायल

cy520520 2025-10-22 03:37:00 views 1254
  

हिंगोट युद्ध में आग के गोलों की सदियों पुरानी परंपरा (फोटो सोर्स- जेएनएन)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इंदौर जिले के महू तहसील क्षेत्र के गांव गौतमपुरा में मंगलवार को हिंगोट अग्निबाण युद्ध की सदियों पुरानी परंपरा भरपूर उत्साह के साथ मंगलवार को निभाई गई। शाम ढलते ही मैदान युद्ध भूमि बन गया।




हवा में उड़ती चिंगारियों व बारूद की गंध के बीच ढाल थामे योद्धाओं का अनूठा प्रदर्शन देखने के लिए हजारों लोग उमड़े। इस लोमहर्षक युद्ध में तुर्रा और कलंगी दल के सदस्यों ने एक-दूसरे पर जलते हिंगोट फेंके। एक घंटे चले इस हमले में दोनों दलों से 36 योद्धा घायल भी हो गए। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें




इनमें से दो को उपचार के लिए इंदौर रेफर करना पड़ा, बाकी सभी को प्राथमिक उपचार दिया गया। 200 से अधिक पुलिसकर्मी, चिकित्सक व फायर ब्रिगेड का अमला भी मौजूद रहा। गौतमपुरा में हिंगोट युद्ध की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
उत्सव के रूप में मनाई जाती है परंपरा

प्रत्येक वर्ष दीपावली के दूसरे दिन धोक पड़वा पर यह परंपरा प्रतीकात्मक युद्ध और उत्सव का रूप में निभाई जाती है। यह परंपरा यहां के लोगों के लिए साहस, गौरव और आस्था का प्रतीक है, जिसे वे मुगल काल से जोड़ते हैं। मानते हैं कि मुगल सैनिक गांवों पर हमला किया करते थे तो उनके पूर्वज उनका मुकाबला हिंगोट से वार करके किया करते थे।

दरअसल, हिंगोट हिंगोरिया नामक पेड़ पर लगने वाला नारियल की तरह सख्त जंगली फल होता है। इसके अंदर बारूद व कोयला भरकर एक डंडी बांध जाती है। इसका ही हिंगोट युद्ध में उपयोग किया जाता है।
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