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लाखों की नौकरी छोड़ मधमुक्खी पालन से बदल रहीं UP के युवाओं की जिंदगी, रोजगार के लिए डॉ. पॉपी दे रहीं मुफ्त ट्रेनिंग

Chikheang 2025-10-28 18:22:49 views 1056
  


जितेंद्र उपाध्याय, लखनऊ। एक ओर जहां युवा विदेश में नौकरी का सपना संजाेए रहते हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो विदेश में लाखों रुपये की नौकरी छोड़ देश की समृद्धि और तरक्की में भागीदारी बनने के सपने को साकार करने में लगे हैं। उन्हीं की श्रेणी में आती हैं, महिला सशक्तीकरण को जीवन का हिस्सा बनाने वाली चिनहट की डा.पॉपी।   राजधानी के चिनहट में मोबाइल मधुमक्खी पालन के साथ महिलाओं और युवतियों को प्रशिक्षण देकर उनके जीवन मेें समृद्धि की मिठास घोल रही हैं। महिलाओं व युवतियों को उद्यमी बनाने का निश्शुल्क प्रशिक्षण भी देती हैं। उनका कहना है कि जब हमने मोबाइल मधुमक्खी पालन शुरू किया तो पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को लेकर जो सोच है, वह भी चुनौती के रूप में सामने थी।
कहां से आई मोबाइल मधुमक्खी पालन की सोच? प्रदेश में पहली बार मोबाइल मधुमक्खी पालन को लेकर मेरी सोच को मेरे पति डा. नितिन सिंह ने हवा दी और उन्होंने हर बाधा को दूर करने में मेरा सहयोग किया। केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश  व हिमांचल प्रदेश में पहले से ही मोबाइल मधुमक्खी पालन होता था, वहां जाकर पहले प्रशिक्षण लिया इसके बाद हमने यहां मोबाइल मधुमक्खी पालन की तैयारी की।   पहले 50 बाक्स के साथ छोटे वाहन पर ले जाने की शुरुआत की और अब बड़े ट्रक पर 150 बाक्स के साथ मधुमक्खी पालन कर रही हूं। अब उद्योग के रूप में मधुमक्खी पालन कर रही हूं और एक साल में सभी खर्च निकाल कर डेढ़ सौ बॉक्स से 15 से 18 लाख रुपये की कमाई कर रही हूं।   
ऐसी होती है कमाई   डा. पॉपी कहती हैं कि एक बाक्स की कीमत चार हजार आती है और एक साल में पांच हजार का शहद निकलता है। शहद के अलावा मोम और डंक की भी बिक्री होती है। इससे यह फायदा होता है कि हम हर मौसम में मधुमक्खी पालन को करते रहते हैं। मधुमक्खी न केवल जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र व प्रदूषण को कम करने में अपनी भूमिका निभाती है, बल्कि शहद विश्व के 33 प्रतिशत खाद्य पदार्थों में प्रयोग होता है, जिसका उत्पादन कर हम अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।   किसानों के लिए भी यह अतिरिक्त आमदनी का जरिया है। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से अनुदान भी दिया जाता है। अब तक 250 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें मधुमक्खी पालन के लिए प्रेरित कर चुकी हैं। मधुमक्खी पालक के रूप में अपना पंजीकरण भी कराया है। वह कहती हैं कि जर्मनी के मुंस्टर विश्वविद्यालय और इजरायल में एक शोध वैज्ञानिक के रूप में काम किया,जहां उन्होंने मधु मक्खियों के प्रबंधन में रुचि विकसित की।   मधुमक्खी अनुसंधान का शोध भी वैज्ञानिक जनरल में प्रकाशित हो चुका है। 2016 में वैज्ञानिक पद से इस्तीफा दे कर वतन वापस आ गई। मधुमक्खी पालन से आपका फायदा तो होता है साथ ही आप पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने का भी कार्य करते हैं। पिछले पांच वर्षों में युवाओं और युवतियों में मधुमक्खी पालन की ओर रुझान बढ़ा है। पालन से जुड़कर हम मधुमक्खियों की आबादी की रक्षा करते हैं जो किसानों के लिए लाभकारी होता है। फसल उत्पादन में वृद्धि में मधुमक्खी भागीदार बनती हैं।
क्या है मोबाइल मधु मक्खी पालन डा.पॉपी बताती हैं कि मधुमक्खी पालन का 100 से 150 बाक्स एक ट्रक पर स्थापित कर दिया जाता है। मौसम के अनुसार उस वाहन को कहीं भी लेजाकर तीन से छह महीने तक खड़ाकर करके शहद निकाला जाता है। इसे मोबाइल मधुमक्खी पालन का नाम दिया गया है। मधुमक्खियां बबूल, नीम, खजूर, सेब,आम, अमरूद व जामुन के बागों में जाकर फलों के स्वाद के अनुरूप शहद एकत्र करती हैं।  
शहद से ज्यादा मधुमक्खियों की संख्या बढ़ाने पर देती  हूं जोर डा. पॉपी का कहना है कि शहद डंक और मोम के अलावा मधुमक्खियां की संख्या बढ़ाने पर भी जोर देती हूं। मधुमक्खी का एक बाक्स से 20 से 25 दिन में दूसरा बाक्स तैयार होता है। अक्टूबर से अगस्त तक मधुमक्खी की जनसंख्या बढ़ने का सबसे उत्तम समय होता है। नया बॉक्स लेने में चार हजार का खर्च आता है जबकि मधुमक्खी की संख्या बढ़ाकर एक  बाक्स की लागत एक हजार ही आती है। ऐसे में तीन हजार प्रति बाक्स की अतिरिक्त आमदनी किसानों को हो जाती है। सरकार भी किसानों से बॉक्स हर साल खरीदती है।
शुरू किया अपना कारोबार डा पॉपी के यहां शोध करने आई पीलीभीत की अंबर राना पीलीभीत में मधुमक्खी पालन कर स्वरोजगार से जुड़ गईं है। वह कहती हैं कि मधुमक्खी पालन कर आमदनी के साथ हम पर्यावरण संरक्षण में भी अपना योगदान करते हैं। दो साल पहले हमने 50 बाक्स से अपना कारोबार शुरू किया था जो अब बढ़ाकर 150 बाक्स हो गया है। एक बॉक्स से तीन से चार हजार की कमाई एक साल में होती है।   अकेली अंबर ही नहीं शाहजहांपुर की ईरान अंसारी एक साल से 100 बाक्स के साथ मधुमक्खी पालन कर रही हैं। उनका कहना है  डा.पॉपी के प्रशिक्षण का तरीका अलग है। मधुमक्खी पालन से फायदे के साथी नुकसान के बारे में भी वह जानकारी देती है जिससे नए उद्यमी मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार हो जाते हैं। सीतापुर की कांती जायसवाल का कहना है कि मधुमक्खी पालन से मेरी अतिरिक्त आमदनी होती है।   बॉक्स लगाने के बाद बस उसकी देखभाल करनी है बाकी मधुमक्खियां अपना काम करती हैं बस शर्त इतनी है हरियाली डेढ़ किलोमीटर की परिधि में जरूर होनी चाहिए, नहीं तो इनके रास्ता भटकने का  खतरा भी रहता है ,लेकिन अभी तक ऐसा कभी नहीं हुआ। 50 बाक्स से पालन छह महीने पहले पूरा किया। इस लघु उद्योग के रूप में स्थापित करने के लिए उद्यान विभाग मैं आवेदन किया है। विभाग की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान का भी प्रावधान है।   विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
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