जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत अभी आवंटियों को आवासीय भवन का कब्जा नहीं मिला है, लेकिन इससे पहले प्राधिकरण आने वाली समस्याओं को दूर करने की योजना तैयार कर रहा है। आवंटियों को रजिस्ट्री के दौरान ही भवन के एरिया को देखते हुए रखरखाव शुल्क (मेंटेनेंस चार्ज) तय कर उसमें अंकित करने की योजना है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
हाल में ही जीडीए अध्यक्ष डा. हृषिकेश भास्कर यशोद ने पीएम आवास के बेहतर रखरखाव और भविष्य में संभावित समस्याओं से बचने के लिए मेंटेनेंस शुल्क तय करने के निर्देश दिए थे। ताकि आवंटियों को उपलब्ध कराए गए भवनों की नियमित देखरेख सुनिश्चित की जा सके।
जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बताया कि आवंटियों को भवन पर कब्जा देने से पहले रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरा कराया जाएगा। इसके साथ ही रजिस्ट्री में भवन एरिया के हिसाब से आंकलन करते हुए आवंटियों के लिए प्रतिमाह का रखरखाव शुल्क तय कर दिया जाएगा। समय-समय पर जरूरत के हिसाब से रखरखाव होने से आवंटित भवनों की गुणवत्ता बनी रहेगी। इससे निवासियों को भविष्य में किसी तरह की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
रखरखाव न होने से जर्जर तुलसी निकेतन होगी जमींदोज
निम्न व अल्प आय वर्ग के लोगों के लिए ड्रा के माध्यम से निकाले गए पीएम आवास योजना के भवनों का रखरखाव न होने से कई बिल्डिंग कम समय में ही जर्जर स्थिति में पहुंच गईं। जीडीए द्वारा तुलसी निकेतन इसका जीता जागता सबूत है।
जीडीए ने वर्ष 1990 में करीब आठ हेक्टेयर जमीन में 2004 ईडब्ल्यूएस और 288 एलआइजी फ्लैट बनाकर यह कालोनी बसाई थी। फ्लैट आवंटन के बाद लोगों ने इमारत की समय-समय पर मरम्मत नहीं कराई, जिसे जमींदोज कर बहुमंजिला इमारत बनाने की योजना है। इस तरह के मामलाें की पुनरावृत्ति न हो, जिसको लेकर जीडीए ने रखरखाव के लिए योजना तैयार की है। |
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