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हरियाणा के पहले Ropeway प्राेजेक्ट का काम शुरू, पहाड़ी पर गुफाएं और जड़ी-बूटियां बनेंगी पर्यटन का केंद्र

LHC0088 2025-10-31 00:07:16 views 983
  

रोपवे पर फिलहाज दो केबिन संचालित करने की योजना।



बलवान शर्मा, नारनौल। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश से ढोसी पहाड़ी पर 57 करोड़ रुपये की रोपवे परियोजना शुरू हो गई है। नेचुरल कंजर्वेटिव जोन (NCZ) में शामिल ढोसी पर रोपवे की परियोजना को ब्रेक लग गया था। जिला नगर योजनाकार विभाग ने नोटिस जारी कर परियोजना को रोक दिया था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हालांकि इस मामले में शुरू से ही प्रयासरत रहे पूर्व मंत्री डाॅ. अभय सिंह यादव ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले ही अधिकारियों की बैठक आयोजित कर इस परियोजना की समीक्षा की थी। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन स्थानीय विकास, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। 57 करोड़ की लागत से रोपवे लगभग 870 मीटर लंबा होगा, जिससे ढोसी पहाड़ी पहुंच आसान होगी और पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।
पूर्व सीएम मनोहर लाल ने की थी पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा

नांगल चौधरी के तत्कालीन विधायक डाॅ. अभय सिंह यादव के आग्रह पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने इस स्थल का 2018 में निरीक्षण किया था। उनका हेलीकाप्टर सीधे ढोसी पर्वत पर उतरा था। इसी दिन उन्होंने इस स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी।

पिछले वर्ष इस योजना को लेकर टेंडर छोड़ दिए गए थे, लेकिन जैसे ही कार्य शुरू किया गया तो यह क्षेत्र एनसीजेड में शामिल होने की वजह से नगर योजनाकार विभाग ने नोटिस जारी कर दिया।

इस वजह से यह कार्य अभी तक रूका हुआ था। आखिरकार इस मामले में मुख्यमंत्री के दखल के बाद नगर योजनाकार विभाग की आपत्ति हटवा दी गई है और निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।
रोपवे पर फिलहाल दो केबिन संचालित करने की योजना

कुलताजपुर गांव से दो एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है, जो रोपवे के शुरुआती बिंदु के रूप में काम करेगी। रोपवे लाइन ढोसी पहाड़ी की चोटी पर समाप्त होगी, जो एक अत्यंत आवश्यक परिवहन समाधान प्रदान करेगी। मार्ग पर दो केबिन (बोगियां) संचालित होंगी।

आगंतुकों के लिए एक सुरक्षित अनुभव सुनिश्चित करने के लिए सभी आधुनिक सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा। इस परियोजना का क्रियान्वयन राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
ढ़ोसी पहाड़ी को माना जाता है जड़ी-बूटियों का खजाना

ढोसी पहाड़ी को अक्सर जड़ी-बूटियों का खजाना माना जाता है। यह वह स्थान है जहां 46 औषधीय तत्वों से बने हर्बल लेप, च्यवनप्राश की खोज सबसे पहले ऋषि च्यवन ने की थी, जिन्होंने यहां कई वर्षों तक तपस्या की थी। पहाड़ी की चोटी पर एक तश्तरी के आकार की समतल सतह है, जहां ऋषि च्यवन को समर्पित एक मंदिर प्रमुखता से स्थित है।

पहाड़ी पर कई मंदिरों, पवित्र तालाब, प्राचीन गुफाए भी हैं और घने जंगल से घिरी हुई है, जिससे यह महान आध्यात्मिक और प्राकृतिक महत्व का स्थल बन गया है। रोपवे परियोजना बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए पुराने दिनों को वापस लाएगी, जो कभी नियमित रूप से ढ़ोसी हिल्स की चोटी पर जाते थे।

भारतीय राष्ट्रीय कला एवं संस्कृति न्यास (आईएनटीएसीएच), रेवाड़ी के जिला संयोजक सुधीर भार्गव ने कहा कि च्यवन ऋषि आश्रम ब्रह्मावर्त नामक प्राचीन क्षेत्र का हिस्सा है और माना जाता है कि यह 10,000 वर्ष से अधिक पुराना है।

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