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बाहुबली’ व ‘विक्टोरिया’ बग्घी पर सवार होंगे संगम नगरी के दूल्हे राजा, सहालग के सीजन के लिए अभी से हुई रिकार्ड बुकिंग

LHC0088 2025-10-31 00:36:51 views 434
  

प्रयागराज में होने वाली शादियों में बग्घियों की मांग युवाओं में बढ़ी है, सहालग का सीजन दूर है पर एडवांस बुकिंग अभी से शुरू है। जागरण



जागरण संवाददाता, प्रयागराज। वैवाहिक सीजन के नजदीक आने के साथ ही सजावट, बैंड-बाजे और बग्घियों की बुकिंग के लिए होड़ मच गई है। सहालग का मौसम भले ही इस बार छोटा हो, लेकिन इन कुछ शुभ तिथियों ने ही बग्घी संचालकों और शादी से जुड़े कारोबारियों की झोली भर दी है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
95 प्रतिशत बग्घियों की हो चुकी बुकिंग

संगम नगरी में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में हैं ‘बाहुबली’ और ‘विक्टोरिया’ बग्घियां, जिनकी बुकिंग रिकार्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। शहर के बग्घी मालिकों के अनुसार, करीब 95 प्रतिशत बुकिंग पूरी हो चुकी है और जिन दिनों विवाह का लग्न है, उन दिनों एक भी बग्घी खाली नहीं है।

  
खास-खास

-12 से 50 हजार तक में बुकिंग

-05 से 10 हजार है डोली का किराया

-95 प्रतिशत हो चुकी बुकिंग
अब कार का गया जमाना, शाही स्टाइल बग्घियों का चलन

पिछले कुछ वर्षों में जहां शादी समारोहों में कार और लग्जरी वाहन ट्रेंड में थे, वहीं इस बार पुरानी परंपराएं एक बार फिर लौट आई हैं। फिल्मी और शाही स्टाइल में सजी-संवरी बग्घियों का चलन युवाओं के बीच तेजी से बढ़ा है।
15 से 50 हजार रुपये में हो रही बुकिंग

बाहुबली बग्घी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसकी बुकिंग 15 हजार से 50 हजार रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, विक्टोरिया बग्घी की बुकिंग 12 से 40 हजार रुपये में की जा रही है। इन दोनों के अलावा ‘हंटर बग्घी’ की भी मांग बढ़ी है। बग्घी संचालक बताते हैं कि इस बार सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों से भी बुकिंग की जा रही है।
ग्रामीण इलाकों से भी हो रही बग्घी की बुकिंग

फाफामऊ, नैनी, झूंसी, फूलपुर, नवाबगंज, सोरांव आदि जगहों से लोग बग्घी की बुकिंग करा रहे हैं। बग्घी सजाने वाले कारीगर बताते हैं कि हर बग्घी की खूबसूरती उसकी सजावट से झलकती है। अब सिर्फ स्थानीय फूलों से ही नहीं, बल्कि विदेशी फूलों से भी सजावट की मांग बढ़ी है।
फूलों की सजावट में 10 हजार खर्च

राजू डेकोरेटर जो बग्घी सजावट का काम करते हैं, बताते हैं कि पहले लोग सिर्फ गेंदे और गुलाब से काम चला लेते थे, अब आर्किड, लिली और ट्यूलिप जैसे फूलों की डिमांड बढ़ी है। एक बग्घी की सजावट में पांच से 10 हजार रुपये तक का खर्च आता है। रोशनी और झूमरों का अलग खर्च होता है। रात की शादियों में रोशनी और एलईडी स्ट्रिप्स से बग्घी चमक उठती है। कुछ बग्घियों में स्पीकर और साउंड सिस्टम तक लगाए जा रहे हैं ताकि बरात के साथ संगीत भी बजता रहे।
‘बाहुबली’ नाम क्यों पड़ा?

कुछ वर्ष पहले जब सुपरहिट फिल्म बाहुबली रिलीज हुई थी, तब से ही इस नाम का उपयोग शादी के आयोजनों में जोर-शोर से होने लगा। बाहुबली बग्घी इसी से प्रेरित है। इसमें बड़े पहिए, सोने की झलक वाले पेंट और ऊंचे सिंहासन जैसी सीट होती है। दूल्हे को इस पर बिठाकर शाही स्टाइल में सजाया जाता है। कई बग्घियों के आगे दो-चार घोड़े और पीछे दो सजावटी सहायक लगते हैं, जो पूरी व्यवस्था को भव्य रूप देते हैं।
‘विक्टोरिया’ बग्घी का ब्रिटिश अंदाज

विक्टोरिया बग्घी का इतिहास बहुत पुराना है। ब्रिटिश काल में इस तरह की बग्घियां राजघरानों में चलती थीं। संगमनगरी के कई बग्घी मालिक अब भी पुराने अंग्रेजी डिजाइन को जिंदा रखे हुए हैं। करेली के बग्घी संचालक अनवर हुसैन बताते हैं कि हमारे दादा के जमाने से विक्टोरिया बग्घी चल रही है। पुराने जमाने में यह शादी का अहम हिस्सा होती थी। अब युवाओं में इसका नया क्रेज जागा है। लोग इसे शाही अंदाज में पसंद कर रहे हैं।
क्या है खासियत?

विक्टोरिया बग्घी की खासियत इसका डिजाइन और आरामदायक कुशन है। इसकी ऊंचाई और चौड़ाई ऐसी होती है कि दूल्हा-दुल्हन आराम से बैठ सकें। बग्घी के दोनों ओर सुनहरी जालीनुमा नक्काशी की जाती है, जिससे यह और भी आकर्षक लगती है।
डोली का फिर लौटा जमाना

जहां दूल्हे के लिए बाहुबली बग्घी ट्रेंड में है, वहीं दुल्हनों के लिए डोली की मांग भी बढ़ी है। पुरानी परंपराओं की झलक दिखाने के लिए कई परिवार अब दुल्हन को घर से डोली में विदा कर रहे हैं। नूरुल्ला रोड के डोली निर्माता सिकंदर व खुल्दाबाद के राजेश कुमार बताते हैं कि पहले डोली का जमाना खत्म होता दिख रहा था, लेकिन अब फिर से लौट आया है।
युवतियों की पसंद बनी है

कई युवतियां चाहती हैं कि उनकी विदाई डोली में हो। यह पल बहुत भावनात्मक होता है। डोली की बुकिंग पांच से दस हजार रुपये में हो रही है। लकड़ी और फाइबर से बनी डोलियों को फूलों और कपड़ों से सजाया जाता है। कुछ परिवारों ने आधुनिक अंदाज में एलईडी लाइट वाली डोली भी बनवाई है, जिसमें गुलाबी और सुनहरी रोशनी झिलमिलाती रहती है।
घोड़ों की साज-सज्जा पर भी विशेष ध्यान

बग्घी जितनी खूबसूरत होती है, उतनी ही आकर्षक होती है उसके साथ दौड़ने वाले घोड़े। घोड़ों को रंगीन कपड़ों, घंटियों और सुनहरी पट्टियों से सजाया जाता है। घोड़ा मालिक तसलीम कुरैशी बताते हैं कि हम घोड़ों की साज-सज्जा पर खास ध्यान देते हैं। उनके लिए अलग-अलग रंग की पोशाकें तैयार की जाती हैं। हर बरात के थीम के हिसाब से कपड़े बदलते हैं।
इनका क्या कहना है?

बाहुबली और विक्टोरिया बग्घी की सजावट में बहुत मेहनत लगती है। हर डिटेलिंग पर ध्यान देना पड़ता है। सोने जैसी झिलमिलाहट देने के लिए खास पेंट इस्तेमाल किया जाता है। एक बग्घी की पालिश और डिजाइन में काफी समय लगता है।

कलीम, बग्घी संचालक

इस बार लग्न के दिन भले ही गिने-चुने हैं, लेकिन हर तिथि पर इतनी बुकिंग है कि हमें मना करना पड़ रहा है। हमारे पास कई बग्घियां हैं और सभी की बुकिंग पूरी हो चुकी है। पहले सिर्फ पारंपरिक विक्टोरिया बग्घियों की मांग होती थी, अब बाहुबली बग्घियों का क्रेज छा गया है।

नफीस, बग्घी संचालक

हर परिवार चाहता है कि शादी ऐसी हो जो याद रह जाए। बग्घी और डोली उसमें चार चांद लगा देते हैं। यह परंपरा भी है और आधुनिक शोभा भी। इस बार सिर्फ दूल्हे ही नहीं, बल्कि कई दुल्हनें भी चाहती हैं कि उनकी एंट्री फिल्मी स्टाइल में हो। इसलिए भतीजी की शादी में डोली की बुकिंग कराई गई है।

अरविंद राय, उद्यमी।
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