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Rajat Jayanti Uttarakhand : प्रदेश में तराई की बढ़ती रही आबादी, सुविधाओं की दरकार

deltin33 2025-11-2 00:37:11 views 816
  

जिले की आबादी करीब 22 लाख, सुविधाओं के नाम पर और प्रयास की जरूरत। प्रतीकात्‍मक



जागरण संवाददाता, रुद्रपुर। राज्य स्थापना के बाद से प्रदेश में कई बड़े बदलाव हुए। विकास को पंख देने के लिए नई योजनाएं, नए निकाय और शहरीकरण भी तेजी से हुआ। सितंबर 1995 में ऊधम सिंह नगर जिले का गठन हुआ, जो नैनीताल जिले से अलग किया गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद यह जिला बना। उस समय यहां 15 निकाय थे और जनसंख्या लगभग 10 लाख थी। 2011 की जनगणना के अनुसार, अब जिले की आबादी लगभग 22 लाख है। रुद्रपुर जिला मुख्यालय है, यहां खेल इंफ्रा, उद्योग, रोजगार के नए अवसर और मेडिकल कालेज स्थापित हुए हैं। इसके अलावा जिले में आज तक एक भी ड्रैनेज सिस्टम नहीं बन सका है, जिससे बारिश के दिनों में समस्याएं होती हैं। तकनीकी शिक्षण संस्थान, पार्किंग, ट्रांसपोर्ट नगर और विकसित पार्कों की कमी है। वर्तमान में यातायात सुधार के लिए रिंग रोड और छात्रावास का निर्माण चल रहा है।

पंतनगर एयरपोर्ट का विस्तारीकरण कर इसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिले में करीब एक हजार कंपनियां हैं, जिसमें एक लाख श्रमिक कार्य करते हैं। यहां सिडकुल की सड़कें टूटी हुई हैं। ट्रांसपोर्ट नगर न होने से वाहनों को पार्क करने का स्थान नहीं है। सार्वजनिक पार्किंग आज तक नहीं बन सका, जिसके चलते हर त्योहार पर जाम की गंभीर समस्या है। बारिश के दिनों में जलभराव बड़़ी समस्याओं में से एक है। ड्रैनेज सिस्टम पर काम धरातल पर नहीं है। तकनीकी शिक्षण संस्थान, मेडिकल की पढ़ाई के लिए अब तक नियम तिथि नहीं घोषित हुई। कौशल केंद्रों में रोजगार परक कोर्स के नाम पर खानापूर्ति हो रही है।
काशीपुर में 2013 में बना नगर निगम

काशीपुर नगर पालिका वर्ष 1872 में बनीं, तब यहां 75 हजार की आबादी थी। 2013 में इसे नगर निगम बना दिया गया। वर्तमान में यहां पौने दो लाख की आबादी है। राज्य बनने के बाद सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार बढ़े, मुख्य मार्ग चौड़ीकरण, बाइपास निर्माण, पेयजल लाइन, नगर निगम भवन, ट्रेंचिंग ग्राउंड, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट की शुरुआत, रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण हुए। जबकि, सीवर और नाली तंत्र का विस्तार व नियमित रखरखाव, जलभराव और कूड़ा प्रबंधन, ट्रैफिक सिस्टम, नए बस अड्डे और शहर में फ्लाईओवर की कार्य में प्रगति, उद्योग प्रदूषण चुनौती है। स्मार्ट सिटी, वेडिंग जोन, अस्पताल विस्तार प्रस्तावित है।
बाजपुर को नहीं मिला कोई लाभ

बाजपुर नगर पंचायत 25 अक्टूबर 1971 में बनीं, तब 2200 आबादी थी। 27 जनवरी 1987 में नगर पंचायत को नगर पालिका का दर्जा मिला उस समय 5700 और 2011 की जनगणना के अनुसार हुआ है, जिसमें 31172 से अधिक आबादी थी। वर्तमान स्थिति के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र की आबादी लगभग 38 हजार है। राज्य बनने के बाद बाजपुर नगर पालिका को विशेष लाभ नहीं मिला है। भोना इस्लामनगर में पार्क निर्माणाधीन है अधिकांश मार्ग अच्छी हालत में है। राज्य बनने के बाद भी अधिकांश समय कांग्रेस पार्टी का ही अध्यक्ष रहा है। छोटे व्यापारियों के लिए नगर पालिका कामप्लेक्स बनाया गया है। कूड़ा निस्तारण के लिए वाहनों व कर्मचारियों की संख्या पहले से करीब पांच गुना बढ़ा दी गई है। अभी कोई नई योजना प्रस्तावित नहीं है।
केलाखेड़ा में कूड़ा डंप करने को भूमि नहीं

केलाखेड़ा नगर पंचायत का गठन 1985 में हुआ। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी आबादी की जनसंख्या 10929 थी। वर्षा ऋतु के समय नगर पंचायत क्षेत्र में वर्तमान में नालियां छोटी होने के कारण तथा नालियों की गंदगी मुख्य मार्गों पर जमा हो जाती है, जिसके लिए नगर पंचायत द्वारा कोई समाधान वर्तमान समय तक नहीं किया गया है। कूड़ा डंप करने के लिए भूमि भी उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2023 में अतिक्रमण हटाया गया। वेंडिंग जोन की योजना गतिमान है।
गूलरभोज में दिख रहे कार्य

गूलरभोज नगर पंचायत 2015 में बना। तब कुल 6975 आबादी थी। राज्य बनने के बाद रजत जयंती पार्क का निर्माण, मछली मार्केट की स्थापना के तहत 20 अस्थाई दुकानों का निर्माण कार्य, श्मशान घाट, मुख्य मार्गों पर फुटपाथ निर्माण कार्य एवं सुंदरीकरण, सामुदायिक भवन, बिजली के पोल व लाइट, डा बाबा साहब भीमराव आंबेडकर पार्क बड़े नालों का निर्माण कार्य हुआ।
किच्छा में 1971 में हुई टाउनएरिया स्थापना

टाउन एरिया की स्थापना 1971 में हुई। तब सात हजार आबादी थी। 1986 में नगर पालिका बनी। वर्तमान में करीब 75 हजार आबादी निवास करती है। राज्य बनने के बाद शहरी विकास पर कई कार्य हुए। नगर पालिका ने सोलर पैनल सिस्टम लगा बिजली का बिल नियंत्रित किया। स्ट्रीट लाइट का बिल 50 लाख से घटकर पांच लाख तक किया। ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए पांच एकड़ भूमि खरीद वहां प्लांट स्थापित करने की दिशा में कार्य। नगला वर्ष, 2025 में पालिका बनी।
सितारगंज में ड्रेनेज सिस्टम की तैयारी

सितारगंज टाउन एरिया की स्थापना 1988 में हुई। तब यहां की आबादी चार हजार थी, जो अब करीब 80 हजार हो चुकी है। विकास की बात करें तो राज्य बनने के बाद सुविधाएं सड़कें, नाली, बस स्टेशन, ट्रेचिंग ग्राउंड का निर्माण हुए हैं। ड्रेनेज सिस्टम की तैयारी भी है।
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