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Magh Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्र के दूसरे दिन करें देवी तारा की खास आरती, हर काम में मिलेगी सफलता

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Magh Gupt Navratri 2026: मां तारा की आरती। (AI generated Image)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। माघ महीने की गुप्त नवरात्र की शुरुआत 19 जनवरी 2026 से हो चुकी है। आज गुप्त नवरात्र का दूसरा दिन है, जो मां तारा को समर्पित है। वहीं, गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है। इन दस महाविद्याओं में देवी तारा का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है। शास्त्रों के अनुसार, देवी तारा को \“तारिणी\“ कहा गया है, यानी भक्तों के बड़े से बड़े संकटों का नाश करने वाली।

अगर आप अपने करियर में लगातार बाधाओं का सामना कर रहे हैं, कोर्ट-कचहरी के मामलों में फंसे हैं या आर्थिक रूप से उन्नति चाहते हैं, तो गुप्त नवरात्र (Magh Gupt Navratri 2026) के दूसरे दिन देवी तारा की विधिवत पूजा और आरती करें, जो इस प्रकार हैं -

  

AI generated Image
।। तारा देवी की आरती ।।

जय तारा तुम जग विख्यात,
ब्रह्माणी रूप सुन्दर भात।

चंद्रमा कोहनी भ्राजत,
हंस रूप बन माँ तुम आई।

कनकवाले केशों में,
धूप-दीप फिर सजे।

कंबल नीला, वस्त्र सुंदर,
चरणों में अंगूर सजे।

चन्दन बासम बिलोचन पर,
बेल पत्रानि मला धरू।

भक्तों के काज राखो,
शंकर मन्दिर विशेष आयूं।

जय तारा तुम जग विख्यात,
ब्रह्माणी रूप सुन्दर भात।।
।।मां दुर्गा की आरती।।

ॐ जय अम्बे गौरी…

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।

भक्तन की दुख हरता । सुख संपति करता॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥

ॐ जय अम्बे गौरी॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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