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धनबाद के टुंडी के सेवानिवृत्त शिक्षक से ठगी। (प्रतीकात्मक फोटो)
जागरण संवाददाता, धनबाद। Dhanbad Cyber Fraud: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग से 10 लाख 50 हजार रुपये की साइबर ठगी के मामले में धनबाद पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर थाना की टीम ने इस कांड में शामिल एक अभियुक्त अरुण अहिरवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से गिरफ्तार किया है। उसके पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं।
धनबाद के ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी ने बताया कि टुंडी थाना क्षेत्र के रतनपुर गांव निवासी 73 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक सेबेस्टियन होरो को साइबर अपराधियों ने अपना शिकार बनाया था। पीड़ित के आवेदन पर मामला दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की गई, जिसके बाद तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे दबोचा गया।
ईडी–सीबीआइ अधिकारी बता व्हाट्सएप कॉल से दी धमकी
साइबर अपराधियों ने पीड़ित से व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क किया था। कॉल करने वालों ने खुद को ईडी और सीबीआई का अधिकारी बताया और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी।
इसके साथ ही डिजिटल अरेस्ट करने की बात कहकर बुजुर्ग को मानसिक रूप से भयभीत किया गया। डर के माहौल में अपराधियों ने पीड़ित से अलग-अलग फर्जी बैंक खातों में कुल 10 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई।
फर्जी खातों से चेक द्वारा निकासी, रकम बांटी गई
ग्रामीण एसपी ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त अरुण अहिरवार ने ठगी की राशि अपने नाम से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुलवाए गए खातों में मंगवाई थी। इसके बाद उसने बैंक शाखा जाकर चेक के माध्यम से नकद निकासी की।
निकाली गई राशि को आरोपी ने अपने अन्य सहयोगियों के बीच बांट दिया। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
डिजिटल अरेस्ट नहीं करती कोई एजेंसी, पुलिस की अपील
ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी जांच एजेंसी द्वारा डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती है। यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन पर धमकी देता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर थाना या साइबर हेल्पलाइन नंबर पर दें। समय पर सूचना मिलने से न सिर्फ ठगी रोकी जा सकती है, बल्कि अपराधियों को पकड़ने में भी मदद मिलती है। |
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