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संवाद सहयोगी, बादशाहपुर। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए चालक सतबीर को 12.17 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि मुआवजा राशि पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज याचिका दायर करने की तिथि से भुगतान तक देय होगा। यह फैसला एमएसीटी की पीठासीन अधिकारी डा. गगन गीत कौर की अदालत ने सुनाया।
ऐसे हुआ हादसा
10 दिसंबर 2018 की रात सतबीर अपनी ड्यूटी के दौरान खाना खाने के लिए नौरंगपुर रोड स्थित कृष्णा होटल पर गया था। मोटरसाइकिल खड़ी कर जब वह पैदल होटल की ओर जा रहा था। तभी मारुति विटारा ब्रेजा कार ने तेज रफ्तार और लापरवाही से सामने खड़े वाहन को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद सतबीर सड़क पर गिर गया और कार उसकी टांग पर चढ़ गई।
इलाज के दौरान उसकी दाहिनी टांग घुटने से ऊपर काटनी पड़ी। घायल को पहले भिवाड़ी के निजी अस्पताल और बाद में एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। बीमा कंपनी ने पीड़ित को मुआवजा देने से इंकार कर दिया।
सतबीर ने अधिवक्ता प्रदीप यादव के माध्यम से अदालत में याचिका दायर की। अधिवक्ता प्रदीप यादव ने पीड़ित सतबीर को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की पैरवी की। अदालत ने माना कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार सतबीर को 85 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता हुई है। दुर्घटना के कारण पीड़ित का सामान्य जीवन और रोजगार गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
एक करोड़ का दावा खारिज
ट्रिब्यूनल ने साक्ष्यों और सबूतों के बाद एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग को अस्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध रिकार्ड के आधार पर याचिकाकर्ता 12.17 लाख रुपये मुआवजा का ही हकदार है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना तेज और लापरवाह ड्राइविंग के कारण हुई। इसलिए चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी तीनों संयुक्त व व्यक्तिगत रूप से मुआवजा भुगतान के लिए जिम्मेदार होंगे। वाहन घटना के समय बीमित था। इसलिए बीमा कंपनी दायित्व से नहीं बच सकती।ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि मुआवजा राशि पीड़ित को बैंक खाते के माध्यम से दी जाए। साथ ही वकील फीस 2,200 तय की गई। |
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