सीएम नीतीश कुमार के काफी करीबी रहे हैं आरसीपी सिंंह। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar News: जदयू में पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की वापसी के मुद्दे पर घमासान कम नहीं हो रहा है। बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने दो टूक कहा-हमारी पार्टी में आरसीपी की कोई जरूरत नहीं है।वे यहां क्यों आएंगे?
इससे पहले केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने भी आरसीपी के जदयू में फिर से शामिल होने की संभावना को खारिज कर दिया था।
हालांकि, श्रवण ने यह स्वीकार किया कि पार्टी में किसी को शामिल करने या न करने का निर्णय मुख्यमंत्री और दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ही ले सकते हैं।
दल के लोग आपस में उलझे
पूरे प्रकरण में दिलचस्प यह है कि जदयू में शामिल होने की आरसीपी की कोई अर्जी नहीं पड़ी हुई है। केवल इस दल के लोग आपस में इस मुद्दे पर उलझे हुए हैं।
इस प्रकरण में सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। समर्थक और विरोधी आरसीपी को जदयू के लिए जरूरी और गैर-जरूरी बता रहे हैं।
इस मामले में श्रवण कुमार ने कुछ अधिक तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आरसीपी शासन और मुख्यमंत्री को विफल बता रहे थे। जदयू से भाजपा में गए।
अपनी नई पार्टी बनाई। दुकान नहीं चल पाई तो इधर आना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरसीपी जन सुराज में भी गए। जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) कह रहे थे कि जदयू को विधानसभा में 25 सीटें आई तो वह संन्यास ले ले लेंगे। श्रवण ने कहा-संन्यासी पार्टी के लोगों की क्या जरूरत है?
आरसीपी ने नितिन को दी बधाई
पटेल सेवा संघ की ओर से आयोजित दही-चूड़ा भोज के बाद आरसीपी ने कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की है। भोज 11 जनवरी को हुआ था।
उसी में कहा था कि वह कभी नीतीश कुमार से अलग नहीं हुए। उसके बाद से ही उनके जदयू में शामिल होने को लेकर अटकलें लग रही हैं। मंगलवार को आरसीपी ने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को बधाई दी। |
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