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मृत टैक्सीडर्मी ट्रॉफी को सजावट के लिए प्रयोग किया जाता है। (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, अमृतसर। अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कस्टम विभाग ने बैंकॉक से आए यात्री को राष्ट्रीय पक्षी मोर की मृत टैक्सीडर्मी ट्रॉफी के साथ गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, पंजाब में यह पहला मामला है, जब मोर की टैक्सीडर्मी तस्करी पकड़ी गई है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 39 वर्षीय मोहम्मद अकबर अहमद के रूप में हुई है।
आरोपी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के गांव कासमपुर, पीर वाला मोहल्ला का रहने वाला है। आरोपी 19 जनवरी को थाई लायन एयर की फ्लाइट SL-214 से बैंकॉक से अमृतसर पहुंचा था। दोपहर करीब 2 बजकर 45 मिनट पर फ्लाइट के उतरते ही कस्टम अधिकारियों ने उसे निगरानी में ले लिया।
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ग्रीन चैनल से निकला तो हुआ शक
कस्टम विभाग की नजरों से बचने के लिए क्लीयरेंस के बाद जैसे ही आरोपी ग्रीन चैनल से बाहर निकलने लगा, अधिकारियों को उसके सामान पर शक हुआ। एक्स-रे जांच में बैग के भीतर संदिग्ध आकृतियां दिखाई दीं। इसके बाद की गई गहन तलाशी में बैग से राष्ट्रीय पक्षी मोर की असली टैक्सीडर्मी ट्रॉफी, लकड़ी और उससे जुड़ी अन्य सामग्री बरामद की गई।
मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए भेजा
कार्रवाई के दौरान कस्टम विभाग ने आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त किया है। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल की फोरेंसिक जांच से इस तस्करी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और इसके पीछे के मास्टरमाइंड तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी इससे पहले कितनी बार ऐसी तस्करी कर चुका है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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बचने के लिए टैक्सीडर्मी को बताया नकली
पूछताछ के दौरान आरोपी ने बरामद की गई मोर की ट्रॉफी को नकली और आर्टिफिशियल बताने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने उसकी दलीलों को खारिज कर दिया। मौके पर बुलाए गए वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने प्रारंभिक जांच में पुष्टि की कि बरामद की गई टैक्सीडर्मी ट्रॉफी असली है और यह राष्ट्रीय पक्षी मोर से ही बनाई गई है।
मोर के अंगों को रखना है गैर-कानूनी
मोर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की शेड्यूल-1 में शामिल है, जो सबसे अधिक संरक्षित श्रेणी मानी जाती है। इसके तहत मोर को मारना, उसके शरीर या अंगों को रखना, बेचना या उसकी टैक्सीडर्मी बनाना पूरी तरह गैरकानूनी है। इसके बाद कस्टम विभाग ने कस्टम एक्ट की धारा 110 के तहत बरामद सामान जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी के खिलाफ कस्टम एक्ट की धारा 135 और वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है। कानून के मुताबिक, राष्ट्रीय पक्षी मोर या उसके अंगों की तस्करी पर 3 से 7 साल तक की सजा और कम से कम 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
जानें क्या होता है मृत टैक्सीटम्री ट्रॉफी
स्पष्ट है कि मोर की मृत टैक्सीडर्मी ट्रॉफी का अर्थ मरे हुए मोर के शरीर को विशेष तरीके से सुरक्षित कर सजावट की वस्तु बनाना होता है। भारत में यह पूरी तरह अपराध है, चाहे मोर की मौत प्राकृतिक कारणों से ही क्यों न हुई हो। इंटरनेशनल मार्किट में इसकी वेल्यू लाखों में हैं, यही कारण है कि चंद पैसों के लिए इसकी तस्करी की जाती है।
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अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कस्टम विभाग ने बैंकॉक से आए यात्री को राष्ट्रीय पक्षी मोर की मृत टैक्सीडर्मी ट्रॉफी के साथ गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, पंजाब में यह पहला मामला है, जब मोर की टैक्सीडर्मी तस्करी पकड़ी गई है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान 39 वर्षीय मोहम्मद अकबर अहमद के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के गांव कासमपुर, पीर वाला मोहल्ला का रहने वाला है। आरोपी 19 जनवरी को थाई लायन एयर की फ्लाइट SL-214 से बैंकॉक से अमृतसर पहुंचा था।
दोपहर करीब 2 बजकर 45 मिनट पर फ्लाइट के उतरते ही कस्टम अधिकारियों ने उसे निगरानी में ले लिया।
ग्रीन चैनल से निकला तो हुआ शक
कस्टम क्लीयरेंस के बाद जैसे ही आरोपी ग्रीन चैनल से बाहर निकलने लगा, अधिकारियों को उसके सामान पर शक हुआ। एक्स-रे जांच में बैग के भीतर संदिग्ध आकृतियां दिखाई दीं। इसके बाद की गई गहन तलाशी में बैग से राष्ट्रीय पक्षी मोर की असली टैक्सीडर्मी ट्रॉफी, लकड़ी और उससे जुड़ी अन्य सामग्री बरामद की गई।
मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए भेजा
कार्रवाई के दौरान कस्टम विभाग ने आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त किया है। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल की फोरेंसिक जांच से इस तस्करी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और इसके पीछे के मास्टरमाइंड तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी इससे पहले कितनी बार ऐसी तस्करी कर चुका है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
बचने के लिए टैक्सीडर्मी को बताया नकली
पूछताछ के दौरान आरोपी ने बरामद की गई मोर की ट्रॉफी को नकली और आर्टिफिशियल बताने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने उसकी दलीलों को खारिज कर दिया। मौके पर बुलाए गए वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने प्रारंभिक जांच में पुष्टि की कि बरामद की गई टैक्सीडर्मी ट्रॉफी असली है और यह राष्ट्रीय पक्षी मोर से ही बनाई गई है।
मोर के अंगों को रखना है गैर-कानूनी
मोर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की शेड्यूल-1 में शामिल है, जो सबसे अधिक संरक्षित श्रेणी मानी जाती है। इसके तहत मोर को मारना, उसके शरीर या अंगों को रखना, बेचना या उसकी टैक्सीडर्मी बनाना पूरी तरह गैरकानूनी है। इसके बाद कस्टम विभाग ने कस्टम एक्ट की धारा 110 के तहत बरामद सामान जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी के खिलाफ कस्टम एक्ट की धारा 135 और वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है। कानून के मुताबिक, राष्ट्रीय पक्षी मोर या उसके अंगों की तस्करी पर 3 से 7 साल तक की सजा और कम से कम 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
जानें क्या होता है मृत टैक्सीटम्री ट्रॉफी
स्पष्ट है कि मोर की मृत टैक्सीडर्मी ट्रॉफी का अर्थ मरे हुए मोर के शरीर को विशेष तरीके से सुरक्षित कर सजावट की वस्तु बनाना होता है। भारत में यह पूरी तरह अपराध है, चाहे मोर की मौत प्राकृतिक कारणों से ही क्यों न हुई हो। इंटरनेशनल मार्किट में इसकी वेल्यू लाखों में हैं, यही कारण है कि चंद पैसों के लिए इसकी तस्करी की जाती है। |
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