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Gandhi kidnapping : पुलिस अपहरणकर्ताओं के बेहद करीब, कदमा से बरामद कार ने खोले बिहार कनेक्शन के राज

cy520520 1 hour(s) ago views 312
  

फाइल फोटो।


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड में जमशेदपुर के युवा उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले में नौ दिनों के सस्पेंस के बाद पुलिस को पहली बड़ी रणनीतिक कामयाबी मिली है। शहर के कदमा थाना क्षेत्र से वारदात में इस्तेमाल की गई सिल्वर रंग की मारुति स्विफ्ट कार की बरामदगी ने जांच की दिशा बदल दी है।    पुलिस सूत्रों का दावा है कि वे अपहरणकर्ताओं के बेहद करीब पहुंच चुके हैं और अगले 48 घंटों के भीतर कैरव की सकुशल वापसी और मामले का खुलासा हो सकता है।   
निर्णायक मोड़ पर जांच: कार से मिले \“डिजिटल और फॉरेंसिक\“ सुराग 13 जनवरी 2026 को पॉश इलाके सीएच एरिया (CH Area) से हुए इस हाई-प्रोफाइल अपहरण के बाद से पुलिस की कई टीमें अंधेरे में हाथ-पांव मार रही थीं। बरामद स्विफ्ट कार को फिलहाल सुरक्षा के लिहाज से कदमा थाना परिसर में कपड़े से ढककर रखा गया है।    फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने कार से कई अहम साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अपहरणकर्ता अब घेराबंदी में हैं, लेकिन अपहृत की सुरक्षा को देखते हुए फूंक-फूंकर कदम रखा जा रहा है।   
नालंदा कनेक्शन: बिहार के पांच जिलों में छापेमारी जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा कार के मालिकाना हक को लेकर हुआ है। कार का मालिक राजशेखर नामक व्यक्ति बताया जा रहा है, जो बिहार के नालंदा जिले (राजगीर थाना क्षेत्र, नई पोखर) का निवासी है।    पुलिस यह सुराग लगा रही है कि क्या राजशेखर स्वयं इस गिरोह का हिस्सा है या उसकी कार का इस्तेमाल किसी संगठित \“किडनैपिंग सिंडिकेट\“ ने किया है।   

इस सुराग के मिलते ही जमशेदपुर पुलिस की एक विशेष टीम बिहार में कैंप कर रही है। वर्तमान में पुलिस की टीमें निम्नलिखित क्षेत्रों में सघन छापेमारी कर रही हैं:  

  •     नालंदा और राजगीर (मुख्य केंद्र)  
  •     वैशाली और पटना
  •     मोकामा, मोतीहारी और जमुई  


फिरौती का एंगल और परिजनों की चुप्पी
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, इस अपहरण का मुख्य उद्देश्य मोटी फिरौती वसूलना है। हालांकि, कैरव गांधी के परिजन इस मामले में पुलिस के साथ खुलकर जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं, जिससे जांच मुख्य रूप से तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों पर टिकी है।    बेटे के गम में कैरव की माता की तबीयत बिगड़ गई है, जिससे परिवार और उद्योग जगत में गहरी चिंता व्याप्त है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि बिहार के इस गिरोह को जमशेदपुर में किसने \“लोकल सपोर्ट\“ मुहैया कराया।    शहर में पूर्व के अपहरण कांडों का इतिहास रहा है कि बाहरी अपराधियों को स्थानीय अपराधियों द्वारा रेकी और छिपने में मदद दी जाती है। उल्लेखनीय है कि डीजीपी तदाशा मिश्रा का प्रस्तावित जमशेदपुर दौरा स्थगित हो गया है, जिसे इसी केस की संवेदनशीलता से जोड़कर देखा जा रहा है।   
109 किमी की रफ्तार ने खोली कैरव गांधी अपहरण की परतें युवा उद्यमी कैरव गांधी अपहरण मामले में पुलिस की जांच सीसीटीवी (CCTV) फुटेज पर केंद्रित हो गई है। सर्किट हाउस से लेकर झारखंड-बिहार बॉर्डर तक के रास्तों को खंगाला जा रहा है।    13 जनवरी के फुटेज के अनुसार, दोपहर 12:52 बजे कैरव की कार कदमा-सोनारी लिंक रोड पर सामान्य गति में थी। लेकिन महज दो मिनट बाद, वही कार 109 किमी/घंटा की तेज रफ्तार से एरोड्रम की ओर लौटती दिखी, जिसके पीछे एक संदिग्ध स्कॉर्पियो लगी थी।    यह स्पष्ट करता है कि अपहरणकर्ताओं ने बीच रास्ते में ही गाड़ी पर नियंत्रण कर लिया था। दोपहर 1:09 बजे कार मरीन ड्राइव के कांदरबेड़ा में लावारिस मिली।   
जानें जमशेदपुर में हुए चर्चित अपहरण कांड जमशेदपुर में उद्यमियों का अपहरण पुलिस के लिए हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। कैरव गांधी मामले ने पुराने जख्मों को ताजा कर दिया है:  

            वर्ष        अपहृत व्यक्ति                 स्थान           परिणाम

  •     2004     अजय सिंह (उद्यमी)          परसुडीह      30 दिन बाद सकुशल बरामद (एसपी संजय लाठकर के नेतृत्व में)
  •     2004     विश्वनाथ गर्ग (उद्यमी)         चांडिल        15 दिन बाद पटना से बरामदगी
  •     2006     कृष्णा भालोटिया (उद्यमी)    चांडिल         पटना के कंकड़बाग से बरामद, मुठभेड़ में एक अपराधी ढेर
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