नकली कफ सीरप (प्रतीकात्मक चित्र)
डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत की घटना के बाद अब दूसरी कंपनियों के नाम पर नकली कफ सीरप बनाकर बेचे जाने का हैरतअंगेज मामला सामने आया है। एक शिकायत पर इंदौर प्रशासन ने सांवेर तहसील के धरमपुरी सोल सिंदा स्थित रेबिहांस हर्बल प्राइवेट लिमिटेड नामक फैक्ट्री पर पिछले माह यानी दिसंबर में छापा मारा था।
यहां मिले कफ सीरप के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। इसकी जांच रिपोर्ट अब आई है। जांच में कफ सीरप अमानक पाए गए हैं। इसके बाद प्रशासन ने फैक्ट्री संचालक सुरेंद्र सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है। फैक्ट्री छापे के समय ही सील कर दी गई थी।
केमिस्ट भी अयोग्य
छापे के दौरान फैक्ट्री में केमिस्ट संजय डेविड कार्यरत मिले थे, जिनकी योग्यता बीएससी (गणित) है। डेविड ने जांच के दौरान बताया था कि सीरप निर्माण का अनुभव उनको एक फार्मा कंपनी में कार्य के दौरान प्राप्त हुआ था। केमिस्ट के पास निर्धारित तकनीकी योग्यता और अधिकृत अनुभव नहीं पाया गया।
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कई तरह के कफ सीरप
इस फैक्ट्री में 30 से अधिक प्रकार के कफ सीरप पाए गए थे। इन उत्पादों पर मनोमय लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड जिरकपुर पंजाब, रेबिहांस बायोटेक प्रालि. देहरादून आदि अंकित पाया गया था। इससे यह पता चला कि दूसरी कंपनियों के नाम पर नकली कफ सीरप बनाए जा रहे थे।
पड़ताल जारी
कंपनी के पास आयुर्वेद कफ सीरप निर्माण का लाइसेंस तो था, लेकिन यहां नकली कफ सीरप बनाए जा रहे थे। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि कंपनी संचालक पर एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू की गई है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि अमानक कफ सीरप की सप्लाई कहां-कहां की गई। |
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