परमार्थ निकेतन में गंगा तट पर पूजन करते बागेश्वर पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और स्वामी चिदानंद सरस्वती। परमार्थ
जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। बागेश्वर पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री गुरुवार को परमार्थ निकेतन पहुंचे। गंगा तट पर पूजा-अर्चना करने के बाद उन्होंने कहा कि ऋषिकेश केवल योग और साधना की भूमि नहीं, बल्कि मानवता को दिशा देने वाला आध्यात्मिक प्रकाश स्तंभ है।
परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने शंखध्वनि, वेदमंत्र और पुष्प वर्षा के साथ उनका स्वागत किया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की मुलाकात के दौरान सनातन धर्म की जीवंतता, युवा पीढ़ी को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता, राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और सेवा को साधना बनाने के भाव पर मंथन हुआ।
श्रीराम लला प्रतिष्ठा के अवसर पर स्वामी चिदानंद ने कहा कि 22 जनवरी भारत की आत्मा, अस्मिता और सनातन चेतना के पुनर्जागरण का महापर्व है। उन्होंने कहा कि श्रीराम भारत के प्राण हैं। मर्यादा, करुणा, धर्म और राष्ट्र भक्ति के शाश्वत प्रतीक हैं। श्रीराम लला प्रतिष्ठा का यह दिन देशवासियों के जीवन में सद्भाव, एकता और नैतिक बल को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी परमार्थ निकेतन की वैश्विक सेवा-यात्रा की सराहना की। उन्होंने आगामी सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का निमंत्रण स्वामी चिदानंद सरस्वती को दिया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इस पहल को सराहा।
उन्होंने बागेश्वर धाम कैंसर अस्पताल, मेडिकल एंड साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रगति के विषय में जानकारी ली। आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अस्पताल की वर्तमान स्थिति, भावी योजनाओं और सेवा-उद्देश्य से अवगत कराया।
स्वामी चिदानंद ने कहा कि बागेश्वर धाम कैंसर अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं, बल्कि करुणा, सेवा और संकल्प की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह उस सनातन सोच का प्रतीक है जहां नर सेवा ही नारायण सेवा को जीवन का मूल मंत्र माना गया है।
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