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Gold Silver ETF Hike: 11 बजते ही गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में 30% की तूफानी तेजी, क्या यह निवेश का सही समय?
नई दिल्ली। गुरुवार 22 जनवरी 2026 को सोने और चांदी में बड़ी गिरावट देखी गई थी। इस गिरावट का असर गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (Gold Silver ETF Crash) पर भी पड़ा था। अब एक दिन बाद यानी शुक्रवार 23 जनवरी को सोने और चांदी में तूफानी तेजी देखी गई। इसका सीधा असर गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ (Gold Silver ETF Hike) में भी तेजी के रूप में देखा गया।
एक तरह MCX पर सोने और चांदी के दाम बढ़े। एमसीएक्स पर गोल्ड सुबह 11 बजकर 36 मिनट पर 158268 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि सिल्वर 335804 रुपये (Gold Silver Hike) के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। दूसरी ओर सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड 23 जनवरी को तेजी से ऊपर चढ़े, और बीते दिन हुए भारी नुकसान की भरपाई की।
कल के निचले स्तर से 30% तक की आई तेजी
बीते कल गोल्ड सिल्वर ईटीएफ में 20 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली थी। गुरुवार के निचले स्तर से आज यह 30 फीसदी ऊपर चले गए हैं। यानी सोने, चांदी के ETF गुरुवार के निचले स्तर से 30% तक बढ़े।
टाटा सिल्वर ETF 22 जनवरी को 24 प्रतिशत तक गिर गया था, और 25.56 रुपये प्रति यूनिट के निचले स्तर पर पहुंच गया था। आज यानी 23 जनवरी को यह ETF तेजी से ऊपर चढ़ा, 17 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर दिन के हाई 33 रुपये प्रति यूनिट पर पहुंच गया।
ग्रोव गोल्ड ETF फिलहाल सभी गोल्ड ETF में टॉप गेनर है। आज इस ETF के दाम 7 प्रतिशत बढ़कर 155.97 रुपये प्रति यूनिट हो गए।
मार्केट के हिसाब से इनकी कीमतें में उतार-चढ़ाव होता रहता है। हो सकता है जब आप इस खबर को पढ़ रहे हैं तो इसमें उतार या फिर चढ़ाव आ गया हो।
निवेश को लेकर क्या बोले एक्सपर्ट?
22 जनवरी को क्रैश के बारे में बात करते हुए, पॉल एसेट के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट और 129 वेल्थ फंड के फंड मैनेजर प्रसेनजीत पॉल ने कहा कि कल जैसे दिनों में इन्वेस्टर्स को जो बात परेशान करती है, वह सोने या चांदी की कीमत में गिरावट नहीं है, बल्कि वह स्थिरता का भ्रम है जो ETF बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि कीमती धातुएं अस्थिर एसेट हैं, ETF उन्हें स्टॉक की तरह ट्रेडेबल बनाते हैं, जिससे इन्वेस्टर्स रोज़ाना कीमतों में होने वाले बदलावों पर रिएक्ट करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। असली रिस्क उन्हें बिना किसी स्पष्ट एलोकेशन या मकसद के या बिना किसी सही एंट्री-एग्जिट प्लान के खरीदना है।
आनंद राठी शेयर और स्टॉक ब्रोकर्स में एसोसिएट निदेशक तन्वी कंचन ने कहा कि निवेशकों को एक ही बार में सारा पैसा लगाने के बजाय, आने वाले हफ्तों या महीनों में धीरे-धीरे खरीदारी करने पर विचार करना चाहिए। सिस्टमैटिक खरीदारी के जरिए पोर्टफोलियो का 5-10% कीमती धातुओं के ETF में लगाने से टाइमिंग का रिस्क कम होता है, साथ ही ऐसे एसेट क्लास में एक्सपोजर बना रहता है जिसे जियोपॉलिटिकल अस्थिरता और मॉनेटरी पॉलिसी की अनिश्चितता से फायदा होता है।
डिस्क्लेमर: जागरण बिजनेस किसी को भी शेयर बाजार या फिर म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सलाह नहीं देता। कहीं भी निवेश करने से पहले आर्थिक सलाहकार से सलाह जरूर लें।
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