जौनपुर में डॉक्टर बनने की चाह में युवक ने खुद काटा पैर, पुलिस ने किया खुलासा।
जागरण संवाददाता, जौनपुर। जिले में लाइन बाजार थाना क्षेत्र के खलीलपुर गांव निवासी 25 वर्षीय सूरज भास्कर पर किसी ने प्राणघातक हमला नहीं किया था, बल्कि उसने स्वयं अपने बाएं पैर का पंजा काट लिया था। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रहे सूरज ने डाक्टर बनने की आकांक्षा में दिव्यांग प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए यह दुस्साहसिक कदम उठाया।
यह जानकारी सहायक पुलिस अधीक्षक और सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने गुरुवार को अपने कार्यालय में मीडिया कर्मियों को दी। उन्होंने बताया कि छानबीन में लगाई गई पुलिस टीमों ने इससे संबंधित पुख्ता साक्ष्य संकलित कर लिए हैं। हालांकि, काफी तलाशने के बाद भी अभी तक कटा हुआ पंजा नहीं मिल सका है। मौके से पुलिस को खेतों में खोजबीन के दौरान एनेस्थीसिया की शीशी, सिरिंज, कटर और नोटबुक भी मिला है। बताया गया कि उसने यह इंटरनेट से आनलाइन सीख कर किया है।
सूरज ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जौनपुर के एक निजी कॉलेज से फार्मेसी का कोर्स किया था और वर्तमान में वह नीट की तैयारी कर रहा था। सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद तीन आरोपितों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया था। एसपी डा. कौस्तुभ ने राजफाश के लिए तीन टीमें गठित की थीं। आरोपितों से पूछताछ में स्पष्ट हो गया कि घटना में उनकी या किसी अन्य बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता नहीं है। सीडीआर और अन्य इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों की जांच में भी पाया गया कि मौके पर किसी का आना-जाना नहीं हुआ था।
यह घटना 18 जनवरी की सुबह हुई, जब सूरज भास्कर एक निर्माणाधीन मकान में पढ़ाई करने और सोने गया था। वह बीएचयू में दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवाने गया था। यह घटना काग्निटिव रिजिडिटी का उदाहरण माना जा रहा है। सूरज असफल हुआ तो उसका दिमाग लचीलापन खो बैठा, उसे लगा कि डाक्टर नहीं तो जीवन नहीं। यह आत्महत्या की कोशिश नहीं थी। सूरज मरना नहीं चाहता था, बल्कि विकलांगता प्रमाण पत्र से करियर बनाना चाहता था। यह कहना है डा. सोनाली दीक्षित, साइकोलाजिस्ट, आइएमएस बीएचयू का।
जौनपुर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र का रहने वाला सूरज भास्कर नीट की तैयारी कर रहा था। उसने लक्ष्य बनाया था कि 2026 में किसी भी हाल में उसे एमबीबीएस में एडमिशन लेना है। इसके लिए सूरज ने ऐसी कहानी रची कि पुलिस भी गुमराह हो गई। उसने बताया कि गुरुवार की रात कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की और जब वह सोकर उठा तो उसके बाएं पैर का पंजा नहीं था। सूरज के बयान के आधार पर पुलिस ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने जांच के दौरान जब सूरज से बयान लेना शुरू किया, तो वह बार-बार बयान बदलने और भरमाने की कोशिश कर रहा था। बार-बार बयान बदलने के कारण पुलिस को शक हो गया। सर्विलांस के माध्यम से पुलिस ने सूरज की कॉल डिटेल निकलवाई। पता चला कि सूरज की एक प्रेमिका है, जिससे वह शादी करना चाहता है। पुलिस ने प्रेमिका को पूछताछ के लिए थाने पर बुलाया। प्रेमिका ने बताया कि सूरज किसी भी हाल में 2026 में एमबीबीएस में एडमिशन लेना चाहता है।
इतना ही नहीं, अक्टूबर महीने में सूरज वाराणसी के बीएचयू गया था। वहां उसने दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाने की कोशिश की, लेकिन दिव्यांग ना होने के कारण उसका सर्टिफिकेट नहीं बन सका। सूरज ने फिर खुद को दिव्यांग बनाने का फैसला कर लिया। सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता के मुताबिक, सूरज ने अपने पैर का पंजा खुद ही काटा था। दर्द से बचने के लिए सूरज ने खुद ही इंजेक्शन लगाया और फिर ग्राइंडर से पंजा काट लिया।
यह मामला न केवल एक युवक की मानसिक स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे समाज में डाक्टर बनने की चाहत युवा पीढ़ी को किस हद तक ले जा सकती है। सूरज की यह कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या शिक्षा प्रणाली और समाज की अपेक्षाएं युवाओं पर इतना दबाव डाल रही हैं कि वे ऐसे चरम कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं। इस घटना ने न केवल जौनपुर बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया है। यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसे समाज और शिक्षा प्रणाली को गंभीरता से लेना चाहिए। |
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