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जागरण संवाददाता, कानपुर। यूं तो कुशाग्र के हत्यारे घटना के बाद से ही जमानत न मिलने से जेल में थे, लेकिन गुरुवार की रात उन पर भारी पड़ी। उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद तीनों हत्यारें उदास और खोए-खोए से रहे। रातभर करवटें बदलते रहे। पूरी रात बैचेनी में कटी।
सुबह होने पर हर किसी से एक ही बात अब उम्रभर जेल में रहेंगे, क्या कभी हाईकोर्ट से जमानत मिल सकती है। ज्यादातर बंदियों ने उनकी बातें अनसुनी कर दी और कुछ ने कहा कि कर्मों की सजा यहीं भुगतानी होती है। अवसाद जैसी स्थिति देख वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने उन्हें समझाया।
आचार्य नगर निवासी कपड़ा कारोबारी मनीष कनोडिया के बेटे जैपुरिया स्कूल के हाईस्कूल के छात्र कुशाग्र कनोडिया की कोचिंग जाते समय 30 अक्टूबर 2023 को 30 लाख की फिरौती के लिए अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। मनीष कनोडिया के चाचा संजय कनोडिया ने रायपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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31 अक्टूबर 2023 को कुशाग्र का शव प्रभात शुक्ला के ओमनगर स्थित घर के बाहर बनी कोठरी से बरामद किया गया था। पुलिस ने कुशाग्र की हत्या में ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और साथी शिवा गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था।
अपर जिला जज 11 सुभाष सिंह की कोर्ट ने गुरुवार को तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के बाद गुरुवार की पहली रात रचिता, प्रभात और शिवा की नींद उड़ी रही। शुक्रवार को भी उदास थे।
तीनों लोग कई बार रोते हुए देखे गए। वरिष्ठ जेल अधीक्षक बीडी पांडेय ने बताया कि शुक्रवार को बंदी रक्षकों ने बताया कि रचिता, प्रभात और शिवा खोए-खोए हैं। अवसाद की स्थिति में है तो उन्हें समझाया गया। |
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