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लक्ष्य साधकर तैयारी करने से सफलता चूमती है कदम, मोबाइल से दूरी बना कर्नलगंज की डॉ पूजा ने लिख दी सक्सेस की नई कहानी

deltin33 3 hour(s) ago views 959
  



पंकज मिश्र, कर्नलगंज (गोंडा)। लक्ष्य साधकर और सही योजना के साथ तैयारी करने से सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है। यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि सफलता का मूलमंत्र है। जिसे कर्नलगंज की डा पूजा मोदनवाल ने सच कर दिखाया है। हाल ही में आयोजित सुपर स्पेशियलिटी प्रवेश परीक्षा जनवरी 2026 में अखिल भारतीय स्तर पर 20 वां स्थान प्राप्त कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश के प्रतिष्ठित श्री चित्रा तिरुनल चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (न्यूरोसर्जरी) पाठ्यक्रम में हुआ है। यह संस्थान उन्नत न्यूरो चिकित्सा, शोध और प्रशिक्षण के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।

कर्नलगंज सदर बाजार मुहल्ला निवासी अनोखेलाल मोदनवाल व माता बीनू मोदनवाल की बेटी पूजा मोदनवाल है। इनकी दादी नगरपालिका चेयरमैन रामलली व उनके पति रामजीलाल मोदनवाल पूर्व चेयरमैन हैं। पूजा ने पांचवीं तक दयानंद बाल विद्या मंदिर कर्नलगंज में पढ़ाई की। इसके बाद छठवीं से 12 वीं तक की लखनऊ के जीवन धारा कान्वेंट स्कूल से पढ़ाई की। लखनऊ में ही एक साल कोचिंग की।

पहले ही प्रयास में नीट की परीक्षा में सफल हो गईं। नीट परीक्षा में आल इंडिया 100 वीं रैंक मिली। काउंसिलिंग में केएमई अस्पताल मुंबई से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। अंतिम वर्ष में ही मेडिकल परीक्षा पास कर मेडिकल सर्जन की पढ़ाई के लिए पीएसआरआइ अस्पताल दिल्ली में चयन हो गया। तीन साल बाद एमएस की पढ़ाई पूरी होने के अंतिम साल में मेडिकल की परीक्षा में सफल होकर सुपर स्पेलाइजेशन न्यूरो विभाग जेजे हास्पिटल मुंबई में चयन हुआ।

मस्तिष्क स्वस्थ है तो समझिए पूरा शरीर स्वस्थ

डा पूजा मोदनवाल ने बताया कि मस्तिष्क स्वस्थ है तो समझिए पूरा शरीर स्वस्थ है। मैंने एमबीबीएस की पढ़ाई सेठ जीएस मेडिकल कालेज एवं केइएम अस्पताल मुंबई से पूर्ण की। इसके पश्चात मैंने पीएसआरआइ अस्पताल नई दिल्ली से डीएनबी जनरल सर्जरी की। मेरी रुचि न्यूरोसर्जरी में थी, इसलिए मैंने होली फैमिली अस्पताल नई दिल्ली के न्यूरोसर्जरी विभाग में सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्य करना प्रारंभ किया। इस दौरान काम करते हुए और न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हुए प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।

न्यूरोसर्जरी एक बेहद चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है और इसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी कम है। भारत में लगभग ढाई से तीन प्रतिशत ही न्यूरोसर्जन महिलाएं हैं। भारत में कुल न्यूरोसर्जनों की संख्या 2500–3900 के बीच है। इसमें करीब 70–120 महिलाएं हैं जो न्यूरो सर्जन हैं। लक्ष्य साधकर तैयारी करने से सफलता कदम चूमती है। पढ़ाई के दौरान इंटरनेट मीडिया से दूरी बनाकर रखें।

मोबाइल का प्रयोग न के बराबर करें। शरीर को फिट रखने के लिए व्यायाम करें। पैदल चलें, जिम जाए और खानपान पर संयम बरतें। डा पूजा मोदनवाल का कहना है कि वह घर पर बात करने के लिए ही फोन का इस्तेमाल करती थीं। वह अपने जिले व प्रदेश का नाम ऊंचा करने के लिए काम करेंगी।
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