सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, एटा। जनपद में स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रही हैं, लेकिन अब चिकित्सकों की गैरहाजिरी ने हालात और बदतर कर दिए हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) के अधीन तैनात पांच चिकित्सक लंबे समय से अनुपस्थित हैं। लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ कार्यालय ने सभी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
सीएचसी, पीएचसी पर पहले से खाली पद, अब अनुपस्थिति से बिगड़े हालात
नोटिस पाने वाले चिकित्सकों में डॉ. नेहा चौधरी (पीएचसी सरौंठ), डॉ. अंकित मित्तल (पीएचसी खड़ौआ), डॉ. अजेंद्र सिंह (सीएचसी बागवाला), डॉ. आकांक्षा सिंह (सीएचसी बागवाला) और डॉ. लवेश कुमार (सीएचसी सकीट) शामिल हैं। इन केंद्रों पर पहले से ही डॉक्टरों की संख्या कम है, ऐसे में चिकित्सकों का अनुपस्थित रहना मरीजों पर सीधा वार साबित हो रहा है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में रहने वाले लोग मामूली बीमारियों के इलाज के लिए भी इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीण मरीज इलाज को भटकने को मजबूर, विशेषज्ञों की कमी ने बढ़ाई मुश्किल
स्थिति को और गंभीर बनाता यह तथ्य है कि जिले में कार्यरत आठ विशेषज्ञ चिकित्सकों को मेडिकल कॉलेज के अधीन कर दिया गया है। इसके चलते सीएचसी और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं। गंभीर रोगों के मरीजों को मजबूरी में जिला अस्पताल या बाहर रेफर किया जा रहा है, जिससे समय, पैसा और संसाधन तीनों की बर्बादी हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही उस वक्त और चुभती है, जब ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीएचसी और पीएचसी ही इलाज का एकमात्र सहारा होते हैं।
आंकड़ों पर एक नजर
सीएचसी - 08
पीएचसी-29
डॉक्टरों के पद- 156
नियमित डॉक्टर- 82
संविदा डॉक्टर- 26
डॉक्टरों की कमी - 48
अनुपस्थित चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि जिले में डॉक्टरों की कमी है और इसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। -
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, सीएमओ। |