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NEET छात्रा मौत मामला: AIIMS ने कहा-अधूरे कागजात से सच कैसे आएगा सामने ?

Chikheang 3 hour(s) ago views 275
  

बिना पूरे कागज जांच अधूरी



डिजिटल डेस्क, पटना। NEET की तैयारी कर रही छात्रा की रेप के बाद मौत के मामले में जांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विशेष जांच टीम (SIT) अब तक एम्स (AIIMS) के मेडिकल बोर्ड को पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाई है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि अधूरे कागजों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना न तो वैज्ञानिक है और न ही नैतिक।
AIIMS के सामने अधूरी मेडिकल चेन

एम्स के फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की समीक्षा केवल एक कागज देखकर नहीं की जा सकती। इसके लिए इलाज से लेकर मौत तक की पूरी मेडिकल चेन जरूरी होती है, जो अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
SIT ने दी DGP को बेसिक रिपोर्ट

हालांकि SIT ने अब तक की पूछताछ के आधार पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट DGP को सौंप दी है। इसमें 15 से 17 लोगों से की गई पूछताछ का जिक्र है, जिसमें अस्पताल कर्मी, हॉस्टल स्टाफ और परिजन शामिल हैं। लेकिन मेडिकल रिव्यू के लिए जरूरी दस्तावेज अभी भी अधूरे हैं।
डॉक्टरों की दो टूक: जल्दबाजी खतरनाक

एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि बिना पोस्टमॉर्टम वीडियो, फोरेंसिक रिपोर्ट और पूरे इलाज का रिकॉर्ड देखे राय देना जांच को भटका सकता है। ऐसे मामलों में एक-एक डॉक्यूमेंट की अहमियत होती है।
PMCH रिपोर्ट ने बदली पूरी दिशा

PMCH की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मामला पूरी तरह पलट गया। रिपोर्ट में यह कहा गया कि यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता। शरीर पर चोटों और जबरन संबंध के संकेत मिलने की बात कही गई, जिससे पुलिस की शुरुआती थ्योरी पर सवाल खड़े हो गए।
AIIMS रिव्यू पर टिकी पूरी जांच

अब पूरे मामले की दिशा AIIMS की रिव्यू रिपोर्ट पर आकर टिक गई है। यही रिपोर्ट तय करेगी कि पोस्टमॉर्टम में उठाए गए सवाल कितने मजबूत हैं और आगे जांच किस दिशा में जाएगी।
पांच विभागों के डॉक्टर कर रहे समीक्षा

AIIMS ने इस केस के लिए पांच वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम बनाई है। इसमें फोरेंसिक, गायनाकोलॉजी, न्यूरोलॉजी, रेडियोलॉजी और मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर और विभाग जोड़े जा सकते हैं।
परिजनों पर दबाव का आरोप

छात्रा के माता-पिता का आरोप है कि SIT असली आरोपियों की बजाय उन्हें ही शक के दायरे में रखकर बार-बार पूछताछ कर रही है। पिता का कहना है कि पांच बार एक ही तरह के सवाल पूछे जा चुके हैं, जिससे परिवार मानसिक दबाव में है।
परिजनों ने क्या बताया SIT को

परिजनों ने साफ कहा कि बेटी पढ़ाई को लेकर गंभीर थी, लेकिन किसी तरह के तनाव में नहीं थी। घर का माहौल सामान्य था और उसने कभी किसी से खतरे या डर की बात नहीं की।
मामा और भाई से रिश्ते पर सवाल

SIT ने छात्रा के मामा और ममेरे भाई से भी पूछताछ की। परिजनों का कहना है कि इन रिश्तों को गलत एंगल से देखा जा रहा है, जबकि बातचीत बिल्कुल सामान्य पारिवारिक थी।
जांच में दिखती बड़ी खामियां

अब तक की जांच में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। हॉस्टल संचालक को रिमांड पर नहीं लिया गया है। हॉस्टल मालिक और उसका बेटा फरार बताए जा रहे हैं, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई है।
CCTV फुटेज अब भी सार्वजनिक नहीं

सबसे अहम सवाल यह है कि छात्रा को हॉस्टल से अस्पताल किसने और कब ले जाया। इसका जवाब CCTV फुटेज दे सकता है, लेकिन अब तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।
केस की शुरुआत कहां से हुई

6 जनवरी को छात्रा पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली थी। एक दिन पहले ही वह अपने घर से पटना पहुंची थी। पहले निजी अस्पताल, फिर दूसरे और अंत में बड़े अस्पताल में इलाज चला।
इलाज के दौरान बिगड़ती हालत

इलाज के दौरान छात्रा की स्थिति लगातार गंभीर होती गई। 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। इसके बाद मामला पुलिस, प्रशासन और सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
पहली थ्योरी: सुसाइड एंगल

शुरुआत में पुलिस ने यूरिन टेस्ट और मोबाइल सर्च हिस्ट्री के आधार पर नींद की दवा खाने की थ्योरी पेश की। यौन हिंसा से इनकार किया गया।
पोस्टमॉर्टम के बाद बदला नैरेटिव

जैसे ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई, पूरी कहानी बदल गई। रिपोर्ट ने बताया कि यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसके बाद FIR दर्ज हुई।
SIT का गठन क्यों हुआ

मामले में बढ़ते सवालों और जनदबाव के बाद 16 जनवरी को SIT का गठन किया गया। इसके बाद हॉस्टल, अस्पताल और गांव स्तर पर जांच शुरू हुई।
चार थ्योरी पर चल रही जांच

जांच एजेंसियां चार प्रमुख एंगल पर काम कर रही हैं,पटना आने से पहले की स्थिति, हॉस्टल पहुंचने के बाद की मूवमेंट, हॉस्टल परिसर के भीतर घटना और किसी करीबी से लगातार संपर्क।
सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच का आधार मेडिकल रिपोर्ट है, तो मेडिकल बोर्ड को पूरे दस्तावेज क्यों नहीं दिए जा रहे?
आधे कागज, अधूरा सच

AIIMS के डॉक्टरों का साफ कहना है, आधे कागजों पर जांच आगे बढ़ी तो न सिर्फ सच दबेगा, बल्कि न्याय की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ जाएगी।
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