
अडानी ग्रुप के लिए अमेरिका से एक बड़ी कानूनी चुनौती सामने आई है। अमेरिकी मार्केट रेगुलेटर SEC (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) ने अमेरिकी अदालत से मांग की है कि उसे भारतीय अरबपति गौतम अडानी और ग्रुप एग्जीक्यूटिव सागर अडानी को ईमेल के जरिए सीधे समन भेजने की अनुमति दी जाए। यह मामला धोखाधड़ी और 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत के आरोप से जुड़ा है।खास बात यह है कि SEC ने कहा कि भारत सरकार पहले ही समन भेजने से जुड़े उसके दो अनुरोधों को खारिज कर चुकी है। अब यह मामला अमेरिका में किसी भारतीय ग्रुप से जुड़ा सबसे हाई-प्रोफाइल कानूनी केस बनता जा रहा है। SEC पिछले साल से ही अडानी ग्रुप के फाउंडर गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को समन भेजने की कोशिश कर रहा है।अडानी ग्रुप अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को 〵बुनियाद✩ता चुका है। कंपनी का कहना है कि वह इन आरोपों के खिलाफ कानूनी तरीके से पूरी मजबूती से अपना बचाव करेगी और इसके लिए सभी उपलब्ध कानूनी ऑप्शन अपनाएगी। हालांकि, 21 जनवरी की लेटेस्ट SEC फाइलिंग को लेकर जब रॉयटर्स ने अडानी ग्रुप से प्रतिक्रिया मांगी, तो कंपनी की ओर से तुरंत कोई जवाब नहीं दिया गया।न्यूयॉर्क की अदालत में दाखिल जवाब में अमेरिकी बाजार नियामक SEC ने साफ कहा है कि मौजूदा कानूनी प्रोसेस के जरिए समन की तामील पूरी होने की संभावना बहुत कम है। इसी वजह से SEC ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि उसे अडानी ग्रुप के अधिकारियों को सीधे ईमेल के जरिए समन भेजने की अनुमति दी जाए।नवंबर 2024 में सार्वजनिक हुई चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि अडानी ग्रुप के कुछ अधिकारी भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना का हिस्सा थे। उसमें कहा गया है कि यह रिश्वत अडानी ग्रीन एनर्जी (अडानी ग्रुप की यूनिट) द्वारा बनाई गई बिजली की खरीद सुनिश्चित कराने के लिए दी जानी थी।SEC की शिकायत में यह भी कहा गया है कि अडानी ग्रुप के अधिकारियों ने कंपनी की भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों को लेकर गलत या भ्रामक जानकारी दी, जिससे अमेरिकी निवेशकों को गुमराह किया गया।SEC की फाइलिंग के मुताबिक, भारत ने समन तामील कराने के दो अनुरोधों को प्रक्रियागत कारणों (प्रोसीजरल रीजन्स) से खारिज किया। इन कारणों में डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर और सरकारी मुहर जैसी औपचारिकताओं का न होना शामिल था। हालांकि, SEC का कहना है कि हेग कन्वेंशन जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत, जब किसी दूसरे देश में व्यक्ति को समन भेजा जाता है, तो ऐसी औपचारिकताओं की जरूरत नहीं होती।दिसंबर 2024 में दूसरी बार समन खारिज किए जाने पर कोर्ट फाइलिंग में यह बात भी सामने आई कि भारत के कानून मंत्रालय ने SEC के समन भेजने के अधिकार पर ही सवाल खड़े किए। SEC ने अपनी फाइलिंग में कहा है - 【 प्रतिक्रियाओं से यह साफ हो जाता है कि हेग कन्वेंशन के जरिए आगे समन भेजने की कोशिशें सफल होने की संभावना बेहद कम है।' |