अपहरण कांड के और भी काले सच, कई परतों में उलझी साजिश। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। इंस्टाग्राम पर हुई एक दोस्ती ने 13 वर्षीय नाबालिग की जिंदगी को ऐसे अंधेरे में धकेल दिया, जहां वह एक युवक की संगत से निकलकर होटल और स्पा सेंटर के कमरों तक पहुंच गई। युवक के छोड़ देने के बाद होटल मालिकों ने उसे बंधक बनाकर रखा और फिर स्पा सेंटर तक पहुंचा दिया।
17 दिन तक पुलिस को भनक तक नहीं लगी। आखिरकार नौसढ़ इलाके के एक होटल से बरामदगी के बाद पूरा मामला सामने आया, जिसने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि नाबालिग की इंस्टाग्राम पर अभय शर्मा नाम के युवक से दोस्ती हुई थी। बातचीत बढ़ी, भरोसा बना और चैटिंग धीरे-धीरे मुलाकातों तक पहुंच गई। पीड़ित के अनुसार, अभय ने उसे सहारा देने और साथ रखने का भरोसा दिलाया। इसी भरोसे में वह घर से दूर हो गई। करीब एक सप्ताह तक वह अभय के साथ रही।
इस दौरान कहां-कहां गई, किन हालात में रही,इन बिंदुओं की पुलिस अभी जांच कर रही है। अभय शर्मा ने उसे छोड़ दिया यहीं से मामला संगठित अपराध की तरफ बढ़ गया। युवक के जाने के बाद नाबालिग गीडा क्षेत्र के एक होटल के संपर्क में आई। पुलिस के मुताबिक होटल मालिक और मैनेजर ने उसे अपने यहां रखा। बच्ची का आरोप है कि यहां उसे बंधक बनाकर रखने के साथ ही शोषण किया गया।
दबाव बनाया गया कि वह किसी को कुछ न बताए। जांच में सामने आया कि होटल में रखने का उद्देश्य मदद नहीं था। तीन दिन बाद नाबालिग को बड़हलगंज के एक स्पा सेंटर में भेज दिया गया। किशोरी करीब एक सप्ताह तक स्पा सेंटर में रही। वहां उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती रही। जब उसकी हालत गंभीर होने लगी और मामला उजागर होने का खतरा बढ़ा, तो उसे वहां से भी हटाकर दूसरे होटल में छिपाकर रखा गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि किशोरी पांच जनवरी को लापता हुई। उसी दिन परिजनों ने थाने पहुंचकर सूचना दी। गुमशुदगी दर्ज हुई, लेकिन इसके बाद 17 दिन तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला। जबकि बच्ची शहर के भीतर ही थी। शुरुआती दौर में होटलों व स्पा सेंटरों की कोई जांच नहीं हुई।
इंटरनेट मीडिया और डिजिटल ट्रेल को भी नहीं देखा गया।नतीजा यह हुआ कि नाबालिग सिस्टम की पकड़ से बाहर रही। 22 जनवरी को पुलिस को नौसढ़ इलाके के एक होटल में किशोरी के होने की सूचना मिली, जिसके बाद दबिश देकर उसे बरामद कर लिया गया।
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मानव तस्करी के एंगल की हो रही जांच
पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि नाबालिग को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के पीछे कोई आर्थिक सौदा तो नहीं हुआ। होटल और स्पा सेंटर के मालिकों व मैनेजरों के बैंक खातों, काल रिकार्ड और आपसी संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। यदि ‘हैंडओवर’ के बदले पैसे का लेन-देन साबित होता है, तो यह मामला केवल अपहरण या दुष्कर्म नहीं, बल्कि संगठित मानव तस्करी के दायरे में आ जाएगा।
हर सुबह थाने गई,रात को दरवाजे पर देखती रही
पांच जनवरी की वह सुबह भी बाकी दिनों जैसी ही थी। बेटी घर से निकली और फिर लौटकर नहीं आई। उस दिन से किशोरी की मां हर सुबह वह उम्मीद के साथ थाने जाती रही कि शायद आज कोई खबर मिलेगी। और हर रात दरवाज़े की ओर देखते हुए सो जाती शायद बेटी दबे पांव लौट आए। गुमशुदगी दर्ज हो गई थी। कागज़ों में मामला चल रहा था। लेकिन मां के लिए हर दिन एक परीक्षा था। वह रोज़ पूछती बेटी का कुछ पता चला,17 दिन तक यही जवाब मिला कि खोजबीन चल रही है।
जांच के अहम बिंदु
- अभय शर्मा ने बच्ची को किन परिस्थितियों में छोड़ा?
- होटल और स्पा सेंटर के बीच पहले से कोई सांठगांठ थी या नहीं?
- गुमशुदगी के बावजूद शुरुआती 22 दिनों में जांच क्यों ठप रही?
- इंस्टाग्राम चैट, काल डिटेल, लोकेशन और होटल रजिस्टर खंगाले जा रहे हैं।
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