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नोएडा सेक्टर 63 थाना पुलिस की गिरफ्त में ठगी करने के आरोपित।
जागरण संवाददाता, नोएडा। बरेली के गिरोह की तरह बैंक खाते लेकर अन्य लोगों से नौकरी के नाम पर ठगी की रकम खपाने वाले गिरोह का सेक्टर 63 थाना पुलिस ने शनिवार को पर्दाफाश किया। गिरोह के तीन सदस्यों को सेक्टर 63 डी पार्क के पास से दबोचा। आरोपितों के पास से पांच लैपटॉप, छह मोबाइल, दो एटीएम कार्ड, 14500 रुपये व कार बरामद हुई।
एक रैपिडो चालक पीड़ित का खाता लेने की शिकायत पर गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ा। गिरोह सालभर में 100 से ज्यादा लोगों से साढ़े आठ लाख रुपये की ठगी कर चुका है। सदस्य 10वीं व 12वीं कक्षा पास हैं। पुलिस गिरोह के फरार सरगना की तलाश में जुटी है।
नोएडा सेक्टर 63 थाना पुलिस को रैपिडो चालक और महिला की ओर से शिकायत मिली कि उनके साथ ठगी की गई है। पुलिस ने साइबर ठगी का मुकदमा दर्ज कर जांच की। बैंक खातों और मोबाइल नंबर के आधार पर शनिवार को तीन संदिग्ध को सेक्टर 63 डी पार्क के पास से दबोचा।
यूपीआई पर मंगवाते थे रकम
एडीसीपी सेंट्रल नोएडा संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि आरोपितों की पहचान वाराणसी के सिसवां गांव के आयुष पांडेय व प्रियांशु श्रीवास्तव, दादरी के चिटेडा गांव के शिवम के रूप में हुई। तीनों वर्तमान में सेक्टर 62 के एक पीजी में किराये पर रहते हैं। पूछताछ में पता चला है कि आयुष फरार सरगना का दोस्त है। उसने ही गिरोह से प्रियांशु, शिवम व अन्य को जोड़ा था।
सभी मिलकर फैक्ट्री कामगार, डिलीवरी करने वाले व अन्य जरूरतमंद को निशाना बनाते थे। उनको एक हजार से 1500 रुपये तक का लालच देकर मोबाइल व एटीएम कार्ड प्राप्त कर लेते। पीड़ित के मोबाइल पर बिना नंबर अंकित किए यूपीआइ आइडी बनाते। फिर मोबाइल वापस कर देते। दूसरी ओर नौकरी के नाम पर अन्य लोगों से ठगी की रकम यूपीआई पर मंगवाते। फिर ठगी की रकम को एटीएम कार्ड से निकलवा लेते।
एसीपी उमेश कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले आरोपित सेक्टर 63 में रैपिडो बाइक चलाने वाले नायब आलम से मिले थे। आयुष ने अपनी मां की तबीयत खराब होने की बात कहते हुए बैंक खाता मांगा था। उसके खाते में पहली बार में ठगी के 95 हजार रुपये डलवाए थे। ठगों ने इसके एवज में 1500 रुपये बतौर कमीशन दिए थे। दूसरी बार में 95 हजार रुपये डलवाने की बात बोली तो रैपिडो चालक को शक हुआ। उसने मामले की शिकायत पुलिस से की। आरोपितों से मिले दो एटीएम आकाश गुप्ता व जय सिंह नाम के युवकों से लिए गए थे।
गिरोह के सरगना को खाते देते थे तीनों
थाना प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि गिरोह का फरार सरगना नौकरी के नाम पर ठगी करता है, जबकि तीनों गिरफ्तार आरोपित सरगना को यूपीआइ आइडी व क्यूआर कोड उपलब्ध कराते हैं। फिर ठगी की रकम को एटीएम से निकालकर खपाते हैं।
इसके एवज में पांच प्रतिशत कमीशन मिलता है। वह सरगना को हफ्ते में मिलते हैं। अपना कमीशन काटकर ठगी की रकम देते हैं। गिरफ्तार आरोपितों में से प्रियांशु पहले दिल्ली से जेल जा चुका है। सभी आरोपितों का अपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। |
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