उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ---नसीमुद्दीन सिद्दीकी
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊः उत्तर प्रदेश में इस वर्ष पंचायत चुनाव और 2027 में विधानसभा चुनाव के बीच नसीमुद्दीन सिद्दीकी के शनिवार को कांग्रेस की सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से त्यागपत्र देने से खलबली मची है।
उनके इस्तीफे की सूचना मिलने के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय सीतापुर में पार्टी के कार्यक्रम के बाद लखनऊ में सिद्दीकी से मिले और इस्तीफा पर पुर्नविचार का अनुराेध किया।
पूर्व मंत्री अजय राय ने लखनऊ में नसीमुद्दीन सिद्दीकी से उनके आवास पर भेंट की। उनके साथ प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय भी थे। अजय राय ने बताया कि उन्होंने प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय के साथ देर शाम नसीमुद्दीन सिद्दीकी से उनके घर पर मुलाकात कर इस्तीफा वापस लेने की बात की है। नसीमुद्दीन ने उन्हें भरोसा दिया है कि वह अपना इस्तीफा लेने पर पुर्नविचार करेंगे। अभी तक पार्टी ने उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया है।
कांग्रेस काे अगले वर्ष विधानसभा चुनाव और कुछ महीने में होने वाले पंचायत चुनाव से पहले नसीमुद्दीन सिद्दीकी के झटका लगा है। पार्टी के पश्चिमी क्षेत्र के प्रांतीय अध्यक्ष का दायित्व संभाल रहे पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने शनिवार को कांग्रेस की सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से त्यागपत्र दे दिया है।
सिद्दीकी के साथ पूर्व विधायक फरहत हसन उर्फ हाजी शब्बन व राम जियावन, विधान परिषद की पूर्व सदस्य हुस्ना सिद्दीकी सहित 72 नेताओं ने भी पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद बातचीत में सिद्दीकी ने कहा कि पार्टी में वह जमीनी स्तर पर काम करने आए थे, लेकिन उन्हें काम करने का मौका ही नहीं दिया गया।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 22 फरवरी 2018 को उन्होंने नई दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। कांग्रेस को उम्मीद थी कि उनके आने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की स्थिति मजबूत होगी। लगभग आठ वर्ष बाद शनिवार को कांग्रेस से इस्तीफा देने से पहले उन्होंने लखनऊ में अपने आवास पर समर्थकों के साथ बैठक की।
इसके बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय व प्रदेश अध्यक्ष अजय राज को इस्तीफा भेज दिया। चर्चा है कि वह अगली सियासी पारी आजाद सामाज पार्टी के साथ शुरू कर सकते हैं। इसे लेकर पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर से उनकी कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
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वैसे उनके सपा में जाने की चर्चा भी है। बसपा में मायावती के रहते उनकी वापसी मुश्किल मानी जा रही है।नसीमुद्दीन ने बताया कि अभी किसी और पार्टी को ज्वाइन करने के बारे में कोई रणनीति तय नहीं की है। जिस भी पार्टी से प्रस्ताव आएगा उसे लेकर वह अपने समर्थकों के साथ बैठक करके अंतिम निर्णय लेंगे।
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नसीमुद्दीन वर्ष 1991 में बसपा ज्वाइन करने के बाद मायावती की सरकारों में कई अहम विभागों के मंत्री रहे। नसीमुद्दीन को बसपा सुप्रीमो मायावती ने 10 मई 2017 को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते बसपा से निष्कासित कर दिया था। हालांकि, पार्टी से बाहर करने की बात सामने आने से पहले ही उन्हाेंने बसपा से इस्तीफा दे दिया था। |