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‘देश में ईमानदारी की कद्र नहीं, परीक्षा प्रण ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 71

नई दिल्ली। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और लोकतांत्रिक जवाबदेही को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान उन्होंने कहा कि देश में ईमानदारी का महत्व लगातार कम होता जा रहा है और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी लोगों की आवाज सुनने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।




वांगचुक पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल हैं। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है।
‘जवाबदेही तय होना सबसे जरूरी’

एक साक्षात्कार में वांगचुक ने कहा कि केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे से पूरी व्यवस्था नहीं बदल जाएगी, लेकिन इससे जवाबदेही तय करने की शुरुआत हो सकती है। उनके अनुसार यदि किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तो गलतियों और अनियमितताओं का सिलसिला जारी रहेगा।




उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है क्योंकि यही भविष्य के डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर तैयार करती है। यदि चयन प्रक्रिया पर सवाल उठेंगे तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ेगा।
सरकार से अब तक नहीं हुआ कोई संपर्क

वांगचुक ने बताया कि अब तक केंद्र सरकार की ओर से उनसे किसी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क नहीं किया गया है। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संवाद स्थापित करना है।




उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए आगे आती है तो यह देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के हित में होगा।
संसद में शिक्षा सुधार पर चर्चा की मांग

वांगचुक ने सुझाव दिया कि संसद के आगामी सत्र में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और सुधारों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उनका मानना है कि केवल राजनीतिक नेतृत्व ही नहीं, बल्कि शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और छात्रों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए ताकि दीर्घकालिक समाधान तैयार किए जा सकें।




उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल एक विभाग का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
राजनीति से ऊपर बताया आंदोलन

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं है। उनका कहना है कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इस मुद्दे पर समर्थन देते हैं तो उसका स्वागत किया जाएगा, क्योंकि शिक्षा और युवाओं का भविष्य किसी एक दल का नहीं बल्कि पूरे देश का विषय है।

वांगचुक ने कहा कि समाज के अधिक से अधिक लोगों को भी इस मुद्दे पर जागरूक होकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री के लिए दिया संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपने संदेश में वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र संवाद, संवेदनशीलता और सहानुभूति से मजबूत होता है। उन्होंने अपील की कि सरकार को लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता की बात सुनना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के दीर्घकालिक हित में होता है और इससे शासन व्यवस्था पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होता है।






National Desk



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