मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना' व्यापक पात्रता जांच के कारण एक बार फिर सुर्खियों में है। लाभार्थियों के दस्तावेजों की सघन जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें योजना के नियमों के विपरीत सरकारी कर्मचारी और अन्य कथित अपात्र महिलाओं को भी आर्थिक सहायता मिल रही थी। इसी के बाद सरकार ने राज्यभर में सत्यापन अभियान और तेज कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त किए जा सकते हैं।
सचिवालय की महिला कर्मचारियों के नाम आने से मचा हड़कंप
प्रारंभिक जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला मामला मुंबई स्थित राज्य सचिवालय (मंत्रालय) से सामने आया। जांच में पाया गया कि वहां कार्यरत कुछ महिला कर्मचारी भी योजना के तहत हर महीने मिलने वाली 1,500 रुपये की सहायता राशि प्राप्त कर रही थीं।
योजना के नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता परिवार या अन्य अपात्र श्रेणी के लोग इस योजना का लाभ नहीं ले सकते। इसके बावजूद ऐसे मामलों के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच और सख्त कर दी गई है।
फर्जी दस्तावेज और एक परिवार से कई आवेदन भी जांच के दायरे में
अधिकारियों के अनुसार सत्यापन के दौरान कई अन्य अनियमितताएं भी सामने आई हैं। इनमें कथित फर्जी आय प्रमाण पत्र, बैंक खाते से आधार लिंक न होना, एक ही परिवार से कई आवेदन तथा पात्रता से जुड़े दस्तावेजों में विसंगतियां शामिल हैं।
सरकार अब डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों का मिलान कर रही है ताकि केवल वास्तविक पात्र महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलता रहे। अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों के नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
CAG की रिपोर्ट के बाद बढ़ा दबाव
योजना को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने भी अपनी रिपोर्ट में राज्य की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर चल रही कल्याणकारी योजनाओं के वित्तीय प्रभाव और दीर्घकालिक बोझ का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों के बाद सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलता रहेगा, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
92 लाख आवेदनों की हो रही जांच
सरकारी स्तर पर चल रही जांच में आधार सत्यापन, बैंक खातों का मिलान और आय संबंधी दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा की जा रही है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जांच के दायरे में आए करीब 92 लाख संदिग्ध या अपात्र आवेदनों की समीक्षा की जा रही है। हालांकि अंतिम संख्या सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
योजना को विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू किया गया था। अब बड़े पैमाने पर हो रही जांच और कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद विपक्ष सरकार को घेर रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल पात्र लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाना और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकना है।
प्रशासन का दावा है कि जांच पूरी होने के बाद योजना पहले से अधिक पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से संचालित की जाएगी।

National Desk
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