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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 'आत ...

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गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को विधायकों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों को आत्मनिर्भर आर्थिक इकाइयों में बदलने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने उनसे अन्य राज्यों से खाद्य आयात पर निर्भरता कम करने तथा असम को दूध, मछली, मांस और कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भर बनाने का आग्रह किया।
  राज्य सरकार के विकास एजेंडा पर चर्चा के दौरान विधानसभा को संबोधित करते हुए सरमा ने कहा कि आत्मनिर्भरता हासिल करना राज्य में 'सिंडिकेट कल्चर' को समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका होगा।




  मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंडिकेट प्रणाली को समाप्त करने का उत्तर आत्मनिर्भरता है। एक बार असम आत्मनिर्भर हो जाने पर राज्य के बाहर से आने वाले संसाधनों पर निर्भर रहने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने सभी विधायकों से डेयरी, मत्स्य पालन, पशुधन और कृषि सहित प्रमुख क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर अभियान चलाने की अपील की।
  सरमा ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को 'आत्मनिर्भर निर्वाचन क्षेत्र' बनने का लक्ष्य रखना चाहिए, जहां दूध, मछली, सब्जियां, आलू और अंडे जैसी आवश्यक वस्तुएं पड़ोसी निर्वाचन क्षेत्रों या असम के बाहर से मंगाई जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर उत्पादित हों।




  उन्होंने कहा कि हम आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर असम की बात करते हैं। अब हमें आत्मनिर्भर निर्वाचन क्षेत्रों के निर्माण की दिशा में काम करना होगा। मेरे निर्वाचन क्षेत्र को कहीं और से दूध, मछली या सब्जियां मंगवाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। मुख्यमंत्री ने विधायकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत दुग्ध सहकारी समितियों, मछली पालन, सुअर पालन और मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि इन पहलों से ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी और स्थानीय उत्पादन में वृद्धि होगी।




  डेयरी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अमूल का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि असम को दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर अमूल प्रतिदिन 80 लाख से 1 करोड़ लीटर से अधिक दूध का उत्पादन कर सकती है, तो असम के दर्जनों सफल दुग्ध सहकारी समितियां स्थापित करने और अग्रणी दूध उत्पादक राज्य के रूप में उभरने का कोई कारण नहीं है।
  मुख्यमंत्री सरमा ने विधायकों से सरकारी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में जनता का सहयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया, विशेषकर उन मामलों में जहां भूमि अधिग्रहण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भूस्वामियों को उचित मुआवजा और विकास प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी मिलनी चाहिए।
  मुख्यमंत्री ने असम के विकास के लिए अगले पांच वर्षों को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि राज्य ने पिछले कार्यकाल में एक मजबूत नींव रखी थी, लेकिन अब विकास को गति देने की आवश्यकता है।
  उन्होंने स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के विस्तार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि राज्य की दीर्घकालिक विकास रणनीति के तहत असम के प्रत्येक जिले में अंततः एक मेडिकल कॉलेज होगा।






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