IAF Transport Aircraft Deal: भारत अपनी एयर पावर को बढ़ाने के लिए हजारों-लाखों करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट कर रहा है. इसका ताजा उदाहरण 114 राफेल फाइटर जेट डील है, जिसकी अनुमानित लागत तकरीबन 3.25 लाख करोड़ रुपये है. भारत सरकार ने इस मेगा डील को 12 फरवरी 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है. इस डिफेंस डील की शर्तें अभी तय होनी बाकी हैं, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो इनमें से कुछ जेट फ्लाई-बाय यानी पूरी तरह से तैयार मिलेंगे. बाकी का उत्पादान भारत में किया जाएगा. इसके कई दूरगामी फायदे होंगे. इसके अलावा भारत ने इंडियन नेवी के लिए भी टोही विमान खरीद प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है. इसके तहत P-8I की 6 यूनिट खरीदने की योजना है. भारत के पास पहले से P-8I की 12 यूनिट ऑपरेशनल हैं. इन सबके बीच अब मित्र देश रूस नई दिल्ली को बड़ा ऑफर देने की तैयारी कर रहा है. दरअसल, भारत को मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की सख्त दरकार है, ताकि मुश्किल हालात में सैन्य साजो-सामान को बॉर्डर एरिया तक कम समय में पहुंचाया जा सके. इंडियन एयरफोर्स कई विकल्पों पर विचार कर रहा है. इस बीच खबर आई है कि रूस Ilyushin क्लास का अपग्रेडेड ट्रांसोपोर्ट विमान का ऑफर दे सकता है. खास बात यह है कि रूस इस करार के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने को भी तैयार है.

भारत की वायु शक्ति को नई दिशा देने वाले मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) कार्यक्रम के बीच रूस ने बड़ा दांव चल दिया है. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि भारतीय वायुसेना (IAF) अपने कार्गो क्षमता मानकों में संशोधन करती है तो रूस अपने उन्नत रणनीतिक परिवहन विमान Ilyushin Il-76MD-90AE को व्यापक तकनीक हस्तांतरण (ToT) पैकेज के साथ पेश करने की तैयारी में है. यह पेशकश भारत की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है, जहां MTA कार्यक्रम अब मूल परिकल्पना से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है. एयरफोर्स दशकों से सोवियत और रूसी मूल के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का ऑपरेशन करता रहा है. हेवी एयरलिफ्ट के लिए Ilyushin Il-76 और मध्यम श्रेणी के लिए Antonov An-32 लंबे समय तक रीढ़ की हड्डी रहे हैं. वर्तमान में स्ट्रैटजिक ट्रांसपोर्ट कैपेबिलिटी का बड़ा हिस्सा Boeing C-17 Globemaster III और Il-76MD बेड़े पर टिका है, जिसने मानवीय सहायता, आपदा राहत और हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसे अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. हालांकि, समय के साथ An-32 और पुराने Il-76 विमानों की उम्र बढ़ रही है. ऐसे में IAF ने MTA कार्यक्रम के जरिए इन्हें बदलने की योजना बनाई है. प्रारंभिक RFI में 18 से 30 टन पेलोड क्षमता वाले विमान के बारे में सोचा गया था, जो मुख्य रूप से An-32 को बदलने के लिए थी.





अब संकेत मिल रहे हैं कि IAF ट्रांसपोर्ट फ्लीट को तर्कसंगत बनाने के लिए MTA प्रोग्राम के तहत An-32 के साथ-साथ पुराने Il-76 को भी बदलने पर विचार कर रही है. यदि ऐसा होता है तो पेलोड क्षमता पहले की तुलना में काफी अधिक हो सकती है. इसी संभावित बदलाव को ध्यान में रखते हुए रूस ने Il-76MD-90AE को एक विकल्प के रूप में आगे बढ़ाया है. यह विमान Il-76 परिवार का नवीनतम और उन्नत संस्करण है, जिसमें PS-90A-76 इंजन, मजबूत एयरफ्रेम, आधुनिक एवियोनिक्स और बेहतर ईंधन दक्षता शामिल है. पुराने मॉडलों की तुलना में इसकी पेलोड क्षमता और परिचालन प्रदर्शन बेहतर है. रूस का दावा है कि Il-76MD-90AE आधे-अधूरे और कच्चे रनवे से भी उड़ान भरने और लैंड करने में सक्षम है. भारत जैसे देश के लिए जहां लद्दाख और पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में लॉजिस्टिक सपोर्ट महत्वपूर्ण है, यह क्षमता निर्णायक हो सकती है. हाई अल्टीट्यूड वाले एयरपोर्ट्स और सीमावर्ती क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है.

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