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आर्मेनिया के किलर ड्रोन पर मचा घमासान, भारत को लेकर इजरायल पर भड़का अजरबैजान, दोस्ती में आएगी दरार?

deltin55 2 hour(s) ago views 62












बाकू/तेल अवीव: भारत के एक हथियार को लेकर इजरायल और अजरबैजान के बीच तनाव बढ़ गया है। बुधवार को एक इजरायली मीडिया रिपोर्स में दावा किया गया है कि एक सुसाइड ड्रोन की बिक्री को लेकर अजरबैजान, इजरायल से बहुत नाखुश है। ये सुसाइड ड्रोन आर्मेनिया को बेचा गया है और दावा किया गया है कि ये ड्रोन, भारत ने आर्मेनिया को दिया है। ये ड्रोन, इजरायली Harop ड्रोन जैसा दिखता है और अजरबैजान का दावा है कि भारत ने इसे इजरायली टेक्नोलॉजी से तैयार किया है। अजरबैजान के कुछ अधिकारियों और मिलिट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि ये एक स्ट्रैटजिक ड्रोन है, जो काफी खतरनाक है और इससे अजरबैजान को खतरा है।ग्लोब्स में छपी एक रिपोर्ट में डिफेंस इंडस्ट्री के एक अज्ञात अधिकारी का जिक्र किया गया है। जिसने कहा है कि आर्मेनिया के ड्रैगनफ्लाई 3 लोइटरिंग म्यूनिशन के पीछे की टेक्नोलॉजिकल जानकारी, जिसे पिछले अक्टूबर में आर्मीनिया की फर्म डावारो ने दिखाया था, शायद भारत के जरिए आर्मेनिया पहुंची है। इसने कहा है कि ये ड्रोन, भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 〷क इन इंडिया✩्रोग्राम के तहत बनाया गया है और इसके लिए इजरायली Harop ड्रोन की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया गया है।हारोप ड्रोन पर अजरबैजान को क्यों है आपत्तिइजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने Harop ड्रोन को तैयार किया है। इसे अजरबैजान ने 2020 के नागोर्नो-काराबाख युद्ध के दौरान आर्मेनिया के खिलाफ इस्तेमाल किया था। ये बहुत घातक ड्रोन है और भारत भी इसे इस्तेमाल करता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लाहौर स्थित एयर डिफेंस सिस्टम के रडार को उड़ाने में भारत ने जिन ड्रोनों का इस्तेमाल किया था, उनमें ये ड्रोन भी शामिल था। वहीं, यॉर्कटाउन इंस्टीट्यूट में तुरान रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर और बार-इलान यूनिवर्सिटी के बेगिन-सादात सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज के रिसर्च फेलो जोसेफ एपस्टीन ने कहा है कि "अगर भारत ने ऐसी टेक्नोलॉजी लीक भी की है तो अजरबैजान जरूर समझ जाएगा कि यह इजरायल का जानबूझकर किया गया कदम नहीं था, क्योंकि आर्मेनिया को मिलिट्री टेक्नोलॉजी ट्रांसफर येरुशलम के लिए उतना ही खतरनाक है जितना बाकू के लिए, क्योंकि आर्मेनिया के तेहरान के साथ अच्छे रिश्ते हैं।"इजरायली डिफेंस इंडस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने "ग्लोब्स" को बताया है, कि उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी की जानकारी भारत से आर्मेनिया तक पहुंची है। साथ ही, "ग्लोब्स" ने दावा किया है कि अज़रबैजान इसको लेकर बहुत नाखुश है, क्योंकि आर्मेनिया के पास ऐसे स्ट्रेटेजिक साधन होने से उसकी सुरक्षा को सीधा खतरा है।अजरबैजान की तरफ से क्या कहा गया है?येरूशलम पोस्ट की रिपोर्ट में अजरबैजान के मिलिट्री सोर्स के हवाले से कहा गया है कि "अजरबैजान दुनिया के कुछ सबसे एडवांस्ड इजरायली डिफेंस सिस्टम चलाता है और अच्छी तरह समझता है कि टेक्नोलॉजी का फैलाव कैसे काम करता है। बाकू जानता है कि इजरायल ने आर्मेनिया को यह क्षमता नहीं दी है। इसके उलट सुझाव देने से सिर्फ उन्हीं को फायदा होता है जो ऐसी जगह टकराव पैदा करना चाहते हैं जहां कोई टकराव नहीं है।" यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दोनों देश कई मोर्चों पर रिश्ते मजबूत कर रहे हैं।3 फरवरी को इजराइल और अजरबैजान ने येरुशलम में प्रधानमंत्री के दफ्तर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर साइन किए, जिसके दौरान नेतन्याहू ने अलीयेव को राजधानी आने का न्योता दिया। वहीं, इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने एक छोटा सा बयान जारी किया है। इसने कहा है कि वह "आर्टिकल में बताए गए असेसमेंट को नहीं मानती" और वह सभी इंटरनेशनल कोलेबोरेशन में "सिर्फ कानून और डिफेंस मिनिस्ट्री की गाइडलाइंस के हिसाब से काम करती है।"हारोप ड्रोन को क्यों माना जाता है खतरनाकपिछले दिनों आर्मेनियाई कंपनी Davaro ने Dragonfly-3 नाम का एक ड्रोन पेश किया है। अजरबैजान का कहना है कि ये ड्रोन, इजरायली हारोप से मिलता है और इसकी टेक्नोलॉजी, भारत ने आर्मेनिया को दी है। भारत की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हारोप ड्रोन को बहुत ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि ये सिर्फ एक ड्रोन नहीं है, बल्कि इजरायल ने इसे ड्रोन और मिसाइल को मिलाकर तैयार किया है। Harop ड्रोन की सबसे बड़ी क्षमता यह है कि यह लक्ष्य पर तुरंत हमला करने के बजाय, 9 घंटे तक हवा में मंडराकर उसकी लगातार निगरानी कर सकता है। यह शिकारी पक्षी की तरह तब तक उड़ता रहता है जब तक कि उसे सही टारगेट (जैसे रडार स्टेशन या टैंक) नहीं मिल जाता।ये आकार में काफी छोटा होता है और ये साइलेंट मोड में काम करता है। जब ये शिकार पर नजर रखता है, उस वक्त इसके इंजन बंद हो जाते हैं और दुश्मन को इस ड्रोन के बारे में तब पता चलता है, जब ये टारगेट से टकराने वाला हो। ये लक्ष्य से टकराकर खुद को उड़ा लेता है, इसीलिए इसे सुसाइड ड्रोन कहा जाता है। ये करीब 23 किलो विस्फोटक लेकर उड़ान भरता है, ऐसे में इससे होने वाली धमाके की क्षमता को समझा जा सकता है। इसका ऑपरेशनल रेंज 1000 किलोमीटर से ज्यादा है।
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