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Rahu Gochar 2026: कुंभ राशि वालों को कब मिलेगी राहु से मुक्ति? इन उपायों से करें मायावी ग्रह को प्रसन्न

Chikheang 2025-11-5 17:37:45 views 832
  

Rahu Gochar 2026: राहु देव कब करेंगे राशि परिवर्तन?



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। राहु और केतु को मायावी ग्रह कहा जाता है। दोनों ही वक्री चाल चलते हैं। राहु और केतु एक राशि में डेढ़ साल तक रहते हैं। इसके बाद एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में गोचर करते हैं। वर्तमान समय में राहु कुंभ राशि में विराजमान हैं। वहीं, केतु सिंह राशि में उपस्थित हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

  

ज्योतिषियों की मानें तो राहु और केतु छाया ग्रह हैं। राहु और केतु की कृपा बरसने से जातक को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। वहीं, राहु की कुदृष्टि पड़ने पर जातक को करियर और कारोबार में ढेर सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

वर्तमान समय में मायावी ग्रह राहु कुंभ राशि में विराजमान हैं। वहीं, केतु सिंह राशि में उपस्थित हैं। राहु और केतु दोनों डेढ़ साल तक कुंभ और सिंह राशि में विराजमान रहेंगे। लेकिन क्या आपको पता है कि कब कुंभ राशि वालों को मायावी ग्रह से मुक्ति मिलेगी?
राहु गोचर

ज्योतिषियों की मानें तो मायावी ग्रह राहु साल 2026 के दिसंबर महीने में राशि परिवर्तन करेंगे। मायावी ग्रह राहु 05 दिसंबर को वक्री चाल चलकर कुंभ राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर करेंगे। इस दिन से मकर राशि के जातकों पर राहु का प्रभाव रहेगा।
केतु गोचर

वहीं, मायावी ग्रह केतु भी साल 2026 के दिसंबर महीने में राशि परिवर्तन करेंगे। मायावी ग्रह केुत 05 दिसंबर को देर रात 10 बजकर 33 मिनट पर वक्री चाल चलकर सिंह राशि से निकलकर कर्क राशि में गोचर करेंगे। इस दिन से कर्क राशि के जातकों पर केतु का प्रभाव रहेगा।
करें ये उपाय

राहु और केतु की कुदृष्टि से मुक्ति पाने के लिए हर सोमवार और शनिवार के दिन स्नान-ध्यान के बाद गंगाजल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। इसके साथ ही पूजा के समय इन मंत्रों का जप करें। वहीं, पूजा के बाद आर्थिक स्थिति अनुसार काले और सफेद चीजों का दान करें।
शिव मंत्र (Shiv Mantra)

1. सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालं ओम्कारम् अमलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।।

2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

3. नमामिशमीशान निर्वाण रूपं विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद स्वरूपं।।

4. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

5. ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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