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निर्यात की अनुमति मिलते ही भारतीय चीनी उद्योग को लगेंगे पंख, इस्मा ने सरकार से की ये मांग

Chikheang 2025-11-6 02:38:06 views 1263
  

निर्यात की अनुमति मिलते ही भारतीय चीनी उद्योग को लगेंगे पंख। (फाइल फोटो)



अरविंद शर्मा, जागरण, नई दिल्ली। भारतीय चीनी उद्योग एक बार फिर वैश्विक मंच पर वापसी की तैयारी में है। कई वर्षों की अनिश्चितता और निर्यात प्रतिबंधों के बाद यह सत्र उद्योग के लिए नए अवसरों का द्वार खोल सकता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

भारतीय चीनी एवं जैव ऊर्जा उत्पादक संघ (इस्मा) के अनुमान के अनुसार चालू सीजन में देश में चीनी उत्पादन 16 से 18 प्रतिशत बढ़कर 343.5 लाख टन तक पहुंच सकता है। इसमें से लगभग 34 लाख टन चीनी एथेनाल उत्पादन के लिए डायवर्ट की जाएगी, जिससे शुद्ध उत्पादन 309.5 लाख टन रहने की उम्मीद है।
देश में कितनी है सालाना खपत?

देश में फिलहाल चीनी की सालाना खपत करीब 285 लाख टन है। इस तरह 74.5 लाख टन का अतिरिक्त स्टाक बचेगा, जो वैश्विक बाजार में भारत को निर्यात की नई संभावना बढ़ाएगा। बीते दो वर्षों से केंद्र सरकार ने घरेलू जरूरतों और एथेनाल मिश्रण नीति के दबाव में चीनी निर्यात पर रोक लगाई हुई थी, लेकिन अब जब उत्पादन चक्र फिर पटरी पर लौटा है तो चीनी उद्योग इसे भारत की वैश्विक पुनर्वापसी का संकेत मान रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें ऊंचे स्तर पर

दुनिया के प्रमुख उत्पादक देशों ब्राजील, थाईलैंड और यूरोपीय संघ में इस वर्ष कमजोर उत्पादन के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे माहौल में भारत के पास निर्यात से लाभ कमाने का सुनहरा मौका है। इस्मा ने सरकार से शीघ्र निर्यात नीति घोषित करने की मांग की है ताकि मिलें समय रहते वैश्विक अनुबंध कर सकें।
भारत कर सकता है 20 लाख टन चीनी का निर्यात

संघ का अनुमान है कि भारत इस सत्र में कम से कम 20 लाख टन चीनी का निर्यात कर सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।हाल के वर्षों में एथेनाल उत्पादन इस पूरे परि²श्य का अहम घटक बनकर उभरा है। 34 लाख टन चीनी को एथेनाल में परिवर्तित करने से न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि पेट्रोल में एथेनाल मिश्रण के लक्ष्य को भी बल मिलेगा। यह परिवर्तन चीनी उद्योग को खाद्य वस्तु उत्पादक से आगे बढ़ाकर हरित ऊर्जा नीति का रणनीतिक स्तंभ बना रहा है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात की अनुमति समय पर मिल गई तो मिलों को नकदी प्रवाह में राहत मिलेगी। इससे गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में तेजी आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। दूसरी ओर केंद्र सरकार को एथेनाल और निर्यात दोनों से कर राजस्व और विदेशी मुद्रा का दोहरा लाभ मिलेगा।

स्पष्ट है कि चीनी उद्योग इस समय तीन मजबूत स्तंभों उत्पादन, ऊर्जा और निर्यात पर खड़ा है। यदि नीति निर्माण में स्थिरता और स्पष्टता बन सकी तो यह क्षेत्र घरेलू आर्थिक स्थिरता का आधार और विदेशी मुद्रा का दीर्घकालिक स्त्रोत सिद्ध हो सकता है।
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