cy520520 • 2025-11-9 14:07:03 • views 1249
जागरण संवाददाता, बरेली। भाजपा को मदद करने वाले छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं द्वारा निगम में हंगामे के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। प्रकरण के सुनियोजित होने और पूर्व की तरह वर्तमान नगर आयुक्त को भी राजनीतिक दबाव में लेने की कोशिश बताया जा रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
इससे पहले पूर्व नगर आयुक्त सैमुअल पाल और निधि गुप्ता वत्स के कार्यकाल में पार्षद और ठेकेदार धरने पर बैठ गए थे। अब फिर से स्मार्ट सिटी आडिटोरियम को बुक करने के लिए निगम प्रशासन द्वारा भुगतान कराए जाने के बाद उपजा विवाद बड़ा स्वरूप ले लिया, जिसमें सत्ताधारी दल के ही एक जनप्रतिनिधि के परोक्ष तौर पर शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
शनिवार को नगर निगम में कुछ इस तरह की चर्चा करते कुछ कर्मचारी मानो पूरे प्रकरण की तह तक जाने की कोशिश कर रहे थे। एक ओर धरना चल रहा था तो दूसरी तरफ निगम परिसर के पार्क में ही बैठा कर्मचारियों का एक समूह पूरे घटनाक्रम पर मंथन कर रहा था, जिसमें एक बार फिर से पूर्व की तरह वर्तमान नगर आयुक्त को राजनीतिक दबाव में लेने की कोशिश किए जाने की बात हावी रही।
एक धड़ा यह कहता रहा कि पूरा प्रकरण सुनियोजित व षड़यंत्र के तहत हुआ, जिसकी शुरुआत नगर निगम द्वारा विद्यार्थी परिषद से आडिटोरियम में कार्यक्रम करने पर बिल भुगतान करने की मांग से हुई, जिसके बाद एबीवीपी ने भले ही भुगतान कर दिया, लेकिन दूसरे ही दिन निगम परिसर में विभिन्न मांगों का हवाला देते हुए धरना दे दिया।
इसके पीछे वर्तमान नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य को राजनीतिक दबाव में लेने की कोशिश समझा जा रहा। तभी दूसरा धड़ा बोल पड़ा, वर्ष-2018 में पूर्व नगर आयुक्त सैमुअल पाल एन और पार्षदों के बीच विवाद के बाद कई दिनों तक पार्षदों ने धरना दे दिया था, जिसमें पार्षदों पर मुकदमा भी हुआ था।
वर्ष-2023-24 में ठेकेदारों ने भुगतान न होने की बात कहते हुए निगम परिसर में धरना दे दिया था। अब एबीवीपी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए हंगामे को भी कमोबेश पूर्व की घटनाक्रम की तरह ही सबकुछ तय होने की बात कही जा रही है। |
|