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ट्रंप से मिलने लकड़ी के बक्से में क्या लेकर पहुंचे थे शहबाज शरीफ और असीम मुनीर? खुल गया राज

LHC0088 2025-9-29 00:11:26 views 1275
  शहबाज शरीफ ने ट्रंप को बताया शांति दूत (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)





डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से पाकस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाक सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस में मुलाकात की तस्वीर सामने आई है। तस्वीर में मुनीर एक लकड़ी के खुले बक्से में रखे दुर्लभ खनिज दिखा रहे हैं और ट्रंप ध्यान से देख रहे हैं। पास खड़े शरीफ मुस्कुराते नजर आ रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

शहबाज शरीफ 6 साल बाद व्हाइट हाउस जाने वाले पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बने हैं। बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी शामिल थे। यह मुलाकात करीब डेढ़ घंटे चली।


शरीफ ने ट्रंप को बताया \“शांति दूत\“

शहबाज शरीफ ने ट्रंप को शांति का दूत बताते हुए वैश्विक संघर्षों को खत्म करने की उनकी कोशिशों की सराहना की। उन्होंने जुलाई में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हुए टैरिफ समझौते के लिए भी धन्यवाद दिया। इस समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में पाकिस्तानी आयात पर 19% शुल्क लगेगा और इसके बदले अमेरिका पाकिस्तान के तेल भंडार के विकास में मदद करेगा।

शरीफ ने भरोसा जताया कि ट्रंप के नेतृत्व में पाकिस्तान-अमेरिका साझेदारी और मजबूत होगी। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों को पाकिस्तीन के कृषि, आईटी, खनन और ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया।


पाकिस्तान ने क्या-क्या समझौता किया?

हाल ही में पाकिस्तान की फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) ने अमेरिकी कंपनी US Strategic Metals के साथ समझौता किया है। इसके तहत पाकिस्तान में एक पॉली-मेटलिक रिफाइनरी बनाने की योजना है। यह कंपनी अमेरिका में महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन और रीसाइक्लिंग पर काम करती है।

इसके अलावा पाकिस्तान की नेशनल लॉजिस्टिक्स कॉर्प ने पुर्तगाल की निर्माण कंपनी Mota-Engil ग्रुप से भी करार किया है। इन समझौतों के जरिए पाकिस्तान से तांबा, सोना, टंगस्टन और दुर्लभ खनिजों का निर्यात तुरंत शुरू करने की योजना है।


शरीफ ने क्या दावा किया?

शरीफ का दावा है कि पाकिस्तान के पास ट्रिलियनों डॉलर मूल्य के खनिज भंडार हैं। विदेशी निवेश से देश अपनी लंबी आर्थिक संकट से निकल सकता है और विदेशी कर्जों पर निर्भरता घटा सकता है। हालांकि, इनमें से अधिकांश खनिज बलूचिस्तान में हैं, जहां लंबे समय से उग्रवाद और अलगाववादी आंदोलन चलते रहे हैं।

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