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निठारी कांड: पुलिस और CBI की लचर जांच से बरी हो गए गुनहगार, मामले में कब-कब क्या हुआ?

Chikheang 2025-11-12 15:07:34 views 857
  








मुनीश शर्मा, नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपित मोनिंदर पंधेर के बाद मंगलवार को सुरेंद्र कोली को भी दोषमुक्त कर दिया। पुलिस और सीबीआई द्वारा मजबूत पैरवी न करने व कमजाेर साक्ष्य के अभाव में निठारी कांड का राज न केवल हमेशा के लिए दफन हो गया, बल्कि मृतक बच्चों व उनके स्वजन को भी न्याय मिलने की उम्मीद हमेशा के लिए खत्म हो गई। नोएडा के आरूषी हत्याकांड की तरह निठारी कांड की सच्चाई भी अब लोगों को कभी पता नहीं चलेगी। 19 बच्चों का हत्यारा कौन था। यह अबूझ पहेली बनकर रह गया।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

पुलिस और सीबीआई की कार्यप्रणाली पर भी यह बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है। इलाहाबाद हाइकोर्ट ने अक्टूबर 2023 में मुख्य आरोपित मोनिंदर सिंह पंधेर व सुरेंद्र कोली को 12 मामलों में बरी कर दिया था। मोनिंदर सिंह अंतिम मामले में जुलाई 2025 में बरी होकर जेल से बाहर आ गया था। हाइकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को नाबालिग से दुष्कर्म व हत्या के मामले में निचली अदालत के फांसी मौत के फैसले को उम्रकैद में बदल दिया था। कोली पर सिर्फ यहीं मामला था। बाकी सभी मामलों में सुरेंद्र कोली को हाइकोर्ट बरी कर चुका था।

शेष एक मामले में भी सुप्रीम कोर्ट से सुरेंद्र कोली मंगलवार को दोषमुक्त हो गया। इसके पीछे कारण पुलिस और सीबीआइ की लचर जांच और कमजोर साक्ष्य रहे। दोनों ही एजेंसी कोर्ट में फोरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्याें को पेश नहीं कर सकी। हर स्तर पर इसका लाभ आरोपितों को मिला। पीड़ितों को उम्मीद थी कि बच्चों के हत्यारों को सजा मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनकी न्याय की उम्मीद अधूरी रह गई।
सुरेंद्र कोली के बुधवार को बाहर आने की संभावना

उधर, गौतमबुद्ध नगर की जिला जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सुरेंद्र कोली के बुधवार को बाहर आने की संभावना है। बता दें कि 29 दिसंबर, 2006 को नोएडा के निठारी गांव में आरोपित मोनिंदर सिंह पंधेर के घर के पीछे एक नाले से आठ बच्चों के कंकाल मिलने के बाद इस हत्याकांड का पर्दाफाश हुआ था। सुरेंद्र कोली मोनिंदर का घरेलू सहायक था। दोनों पर ही बच्चों की हत्या का आरोप लगा था। इस मामले की पहले गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने जांच की। दस दिन बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया।

एक महीने तक अभिरक्षा में रखने पर भी पुलिस और फाेरेंसिक टीम ठोस साक्ष्य जुटाने में नाकाम रही। पुलिस ने कंकाल बरामद करने में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की। आरोपितों की मेडिकल जांच तक नहीं कराई थी। कोठी में बाथरूम के अलावा किसी भी कपड़े पर खून के धब्बे नहीं मिले। जिससे यह साबित हो सकें कि बच्चों की हत्या पंधेर की कोठी के अंदर हुई। मांस, हड्डियां और इंसानी खाल के कटे, फटे टुकड़े भी कोठी के अंदर से बरामद नहीं हुए।

कबूलनामें में बताया गया कि आरोपित कई घटों तक शवों को बाथरूम में रखते थे, लेकिन न तो पुलिस और बाद में सीबीआई इसके ठोस साक्ष्य कोर्ट में पेश कर नहीं पाई। दोनों के कबूलनामे की ऑडियो-वीडियो क्लिप संंबंधी सबूत की चिप भी नकली निकली थी। कबूलनामें के दस्तावेज पर सुरेंद्र कोली के हस्ताक्षर भी नहीं मिले। इससे इतर सीबीआइ लंबी जांच के बाद यह भी सिद्ध नहीं कर पाई कि दोनों की संलिप्तता मानव अंगों की तस्करी में थी। सभी मामलों में इसका लाभ आरोपितों को मिला।
क्या है पूरा मामला?

सीबीआइ विशेष अदालत ने सुरेंद्र कोली को नोएडा निठारी गांव में 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के दुष्कर्म और हत्या के लिए दोषी ठहराया था। फरवरी 2011 में कोर्ट ने उसकी सजा बरकरार रखी थी। उसकी पुनर्विचार याचिका 2014 में खारिज कर दी गई थी। हालांकि, जनवरी 2015 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसकी दया याचिका पर निर्णय में अत्यधिक देरी के कारण उसकी मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।

17 अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निठारी के 12 मामलों में कोली और सह-अभियुक्त पंढेर को बरी कर दिया था। उम्रकैद मामले में सुरेंद्र कोली ने सुधारात्मक याचिका दायर की थी। सीबीआई और पुलिस के कमजोर साक्ष्य व ठोस प्रमाण के अभाव में केस कहीं भी नहीं ठहर सका। कोर्ट ने पुलिस के जुटाए एक बयान और चाकू की बरामदगी के आधार पर आरोपित को दोषी सिद्ध कराने के तर्क को आधारहीन माना। यहां भी लाभ आरोपित को मिला।
स्वजन बोले...आखिर दोषी कौन?

निठारी कांड से संबंधित बच्ची ज्योति के पिता झब्बू लाल और उसकी मां सुनीता दोनों आरोपितों के बरी होने पर बेबस और गुस्से में नजर आए। सिस्टम से लेकर पुलिस, प्रशासन के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हुए दोनों का एक ही सवाल था कि आखिर बच्चों का कातिल और दोषी कौन हैं।

झब्बू लाल ने कहा कि उनकी बेटी मेद्यावी थी और वह डाक्टर बनना चाहती थी। यह महज एक बुरा सपना बनकर ही रह गया। उनको इससे भी ज्यादा मलाल इस बात का है कि जिन्हे शुरूआत से ही गुनहगार माना जा रहा था। वह ही बरी हो गए।
कब-कब क्या हुआ?

  • 29 दिसंबर 2006: निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले। मालिक मनिंदर सिंह पंधेर और उसका नौकर सुरेंद्र कोली गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने जांच शुरू की
  • 11 जनवरी 2007: मामले की जांच सीबीआइ काे सौंपी गई। सीबीआई का पहला दल निठारी पहुंचा। कोठी के पास से 30 और हड्डियां बरामद कीं।
  • 22 मई 2007 : सीबीआइ ने गाजियाबाद की अदालत में मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया। मोनिंदर सिंह पंधेर पर हल्के आरोप लगाए गए। कोली पर दुष्कर्म, अपहरण और हत्या के आरोप लगाए गए।13 फरवरी 2009: निठारी में सिलसिलेवार 19 हत्याओं में से एक 14 वर्षीय रिम्पा हालदार के साथ रेप और उसकी हत्या के लिए विशेष अदालत ने पंधेर तथा कोली को मौत की सजा सुनाई।
  • 11 सितंबर 2009 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को सुनाई गई मौत की सजा से से बरी किया।
  • 20 जुलाई 2014: सुरेंद्र कोली की दया याचिका राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दी।
  • 08 सितंबर 2014 : कोर्ट ने रात एक बजे कोली की फांसी पर रोक लगा दी, कोली की सजा उसी दिन होनी थी।
  • 24 जुलाई 2017: कोली और पंधेर को 20 वर्ष पिंकी सरकार की हत्या और बलात्कार के प्रयास में सीबीआइ अदालत ने दोषी ठहराया। दोनों के खिलाफ हत्या के 16 मामलों में से यह आठवां मामला है, इसमें फैसला सुनाया गया है।
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