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देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत के गांव में बनेगा सेना का एडवांस ट्रेनिंग सेंटर, जवान सीखेंगे युद्ध कौशल

Chikheang 2025-11-18 20:37:20 views 635
  

देश के प्रथम सीडीएस दिवंगत विपिन रावत के पैतृक ग्राम सैणा में ट्रेनिंग लेते सैनिक। साभार गढ़वाल रेजिमेंट  



अनुज खंडेलवाल, जागरण लैंसडौन (पौड़ी): देश के पहले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) रहे जनरल बिपिन रावत के पैतृक गांव सैंणा में एडवांस कैंप का प्रयोग सफल रहने के बाद अब जवान यहां युद्ध के गुर भी सीखेंगे।

गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर ने पौड़ी जिले के द्वारीखाल ब्लाक स्थित सैंणा गांव को सेना के एडवांस ट्रेनिंग सेंटर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

धरातलीय परिस्थितियों में अब तक के सभी ट्रेनिंग सेंटरों के सापेक्ष यह गांव सर्वथा उपयुक्त पाया गया। गांव की दूरी रात में पैदल मार्च के मानकों के अनुरूप भी सटीक है। युद्ध जैसी परिस्थितियों के प्रशिक्षण को भी सैंणा की दुर्गम पहाड़ियां हर दृष्टि से उत्तम हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

  

रेजीमेंटल सेंटर की ओर से जनरल बिपिन रावत के पैतृक गांव में लगाए गए पहले एडवांस कैंप से एक हजार अग्निवीर ट्रेनिंग लेकर लौट आए हैं।

इस दौरान रेजिमेंट के अधिकारियों ने पाया कि पूर्व में सेंधीखाल, दुगड्डा़, कोटद्वार व सीला क्षेत्र में लगाए जाने वाले एडवांस ट्रेनिंग कैंपों की अपेक्षा सैंणा की परिस्थितियां कई मायनों में काफी बेहतर हैं।

सरहद की तरह जहां दुर्गम पहाड़, जंगल व एकांत क्षेत्र सैंणा गांव में मौजूद है, वहीं दुश्मन पर आक्रामण के साथ डिफेंस लेने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की ट्रेनिंग के पूर्वाभ्यास को भी सैंणा का क्षेत्र काफी वृहद है।

  
यह होता है एडवांस कैंप

रेजिमेंट सेंटर में भर्ती के बाद अग्निवीरों को 31 सप्ताह की ट्रेनिंग दी जाती है। 26 सप्ताह की ट्रेनिंग के बाद दूरस्थ क्षेत्र में 14 दिन का एडवांस कैंप लगाया जाता है, जो अग्निवीरों को दी गई 26 सप्ताह की ट्रेनिंग का निचोड़ होता है।

शेष तीन सप्ताह की ट्रेनिंग रेजिमेंट सेंटर में होती है। एडवांस कैंप में वे सभी परिस्थितियां तैयार की जाती हैं, जिनसे अग्निवीरों को युद्ध के दौरान गुजरना पड़ता है।
एडवांस कैंप के मुख्य बिंदु

  • अग्निवीरों को दुश्मन से बचने के लिए बंकर बनाने की ट्रेनिंग
  • जमीन में ट्रेंच बनाने के दौरान इसकी चौड़ाई, गहराई व लंबाई का प्रशिक्षण
  • युद्धकाल के दौरान जंगल में जीवन व्यतीत करना
  • आक्रमण से निपटने, दुश्मन की ओर से पैदा की जाने वाली अड़चनों से निपटने व इन्हें पार करने के गुर
  • दुश्मन पर की जाने वाली कार्रवाई के दौरान आपस में सामंजस्य बनाना
  • रात के समय युद्ध प्रशिक्षण और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना


  


पहले एडवांस कैंप के दौरान हमने पाया कि सैंणा गांव का वातावरण इसके लिए एकदम अनुकूल है। अब रेजिमेंट ने निर्णय लिया गया है कि भविष्य में अग्निवीरों की एडवांस कैंप की ट्रेनिंग सैंणा में ही होगी। प्रथम सीडीएस के प्रति यह हमारी ओर से श्रद्धांजलि होगी। साथ ही सैंणा की मिट्टी हर अग्निवीर को जनरल रावत जैसा वीर सपूत बनने के लिए प्रेरित भी करेगी।
कमांडेंट ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट सेंटर, लैंसडौन


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