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पुनौरा धाम की तर्ज पर होगा सीताकुंड धाम का विकास, 13.10 करोड़ रुपये होंगे खर्च

deltin33 2025-9-23 23:30:22 views 1336
  सीताकुंड धाम स्थित राम जानकी मंदिर। (जागरण फोटो)





संवाद सहयोगी, पीपरा। त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एवं माता सीता के परिणय संस्कार के उपरांत चौथे दिन पावन कंगन खोलने की रस्म का साक्षी सीताकुंड धाम रहा है। अब इस स्थल की पहचान पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित होने जा रही है। पूर्वी चंपारण जिले के पीपरा थाना अंतर्गत बेदीवन मधुबन पंचायत में स्थित ऐतिहासिक सीताकुंड धाम के महत्व को ध्यान में रखते हुए इसका विकास किया जा रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें



बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा 13 करोड़ 10 लाख रुपये की राशि से विकास कार्यों को गति दी जा रही है। यह स्थान जल्द ही नए स्वरूप में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
पुनौरा धाम की तर्ज पर होगा विकास

पौराणिक सीताकुंड धाम का सौंदर्यीकरण एवं विकास पुनौरा धाम की तर्ज पर किया जाएगा। यह प्राचीन धरोहर पूर्वी चंपारण सहित बिहार के लिए गर्व की बात है। इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि से सभी प्रकार की सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा।



स्थानीय विधायक श्यामबाबू प्रसाद यादव ने बताया कि सीताकुंड धाम का चहुंमुखी विकास होगा। इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है। विकास के पहले चरण में 13 करोड़ 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिससे यहां पवित्र कुंड के साथ पूरे परिसर का सौंदर्यीकरण एवं अन्य विकासात्मक कार्य किए जाएंगे।

भव्य प्रवेश द्वार के साथ बनेगा कैफेटेरिया

परिसर में एक भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही कैफेटेरिया के निर्माण की योजना भी है, जहां पर्यटकों के लिए खान-पान एवं आवासीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अतिरिक्त, अतिथि गृह, चहारदीवारी एवं दुकानों के निर्माण के साथ आधुनिक शौचालय भी बनाए जाएंगे।



इस क्रम में सीताकुंड धाम परिसर के चारों ओर वन विभाग द्वारा बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा। यहां अशोक के पौधों के साथ-साथ औषधीय एवं फलदार पौधे भी लगाए जाएंगे, जो इसके सौंदर्य को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे।


रेल व राजमार्ग से है सीधा जुड़ाव

सीताकुंड धाम, माता सीता की जन्मस्थली पुनौरा धाम सीतामढ़ी से लगभग 80 किमी की दूरी पर स्थित है। यह पूर्वी चंपारण के कैथवलिया में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर से 22 किमी उत्तर में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 27 से जुड़ा है। जिला मुख्यालय मोतिहारी से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह धाम पीपरा रेलवे स्टेशन से तीन किमी की दूरी पर है।



यह धाम प्राचीन पवित्र कुंड, विशाल पेड़ों, खंडहरों एवं असंख्य शिलाओं को समेटे हुए करीब 18 एकड़ भूभाग में 15 फीट ऊंचे टीले पर स्थित है। यहां पवित्र कुंड एवं बाबा गिरिजनाथ महादेव का मंदिर भी आस्था का केंद्र है।


राजा विदेह के भाई ने कराया था पवित्र कुंड का निर्माण

पौराणिक सीताकुंड धाम स्थित पवित्र कुंड का निर्माण त्रेतायुग में राजा जनक के भाई कुश ध्वज द्वारा कराया गया था। मान्यता है कि विवाह के उपरांत माता सीता एवं प्रभु श्रीराम की बरात जनकपुर से वापस अयोध्या लौट रही थी। तब रास्ते में यहां ठहरने के दौरान पावन चौथारी की रस्म संपन्न हुई थी।



कुशध्वज ने बरातियों के सत्कार हेतु इस स्थल पर कई तालाब, मंदिर एवं बाग-बगीचे स्थापित किए थे। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी कुंड में माता सीता ने स्नान कर एक प्राचीन शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसे अब गिरिजानाथ महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है।
रामायण परिपथ में मिलता है उल्लेख

पूर्वी चंपारण में स्थित सीताकुंड धाम का उल्लेख रामायण परिपथ में मिलता है। वयोवृद्ध शिक्षाविद् लक्षणदेव सिंह के अनुसार, सीताकुंड का पौराणिक महत्व है। यहां से प्राप्त मौर्यकालीन मूर्तियां इसकी प्राचीनता के प्रमाण हैं। राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित चंपारण गजेटियर में भी सीताकुंड का उल्लेख मिलता है। यहां कंगन के आकार के आम के पत्ते मिलते हैं, जिन्हें दुर्लभ माना जाता है।
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